Monday, 2 May 2011

यह खबर सुखद थी की गुटखा बंद हो गया , पर गुटखा बंद नहीं सिर्फ पौच पर प्रतिबन्ध लगा था , पर यहाँ सोचने वाली बात ये है क गुटखे में सिर्फ पोल्य्थें का प्रयोग बंद हुआ है ,  गुटखा नहीं पर एक बात ये की अब पोल्य्थेने की  जगह पेपर का इस्तेमाल जरूर सुरु हो चूका है, लेकिन क्या किसी ने यहाँ पर ये सोचा की कागज का आखिर कहा तक इस्तेमाल हो सकता है , मन की पोल्य्थेने को अगर आज दुनिया की सबसे प्रदुसित वास्तु कहा जाये तो कोई अतिशयोक्ति न होगी, लेकिन यदि हम पोल्य्थेने की जगह यदि आगाज का इस्तेमाल करते हैं तो जितना कागज का इस्तेमा करेंगे उतने ही पेड़ पौधे कटे जायेंगे  अब जाहिर सी बात ये की इससे भी तो pratachya  या अप्रताच्या रूप से वातावरण को हनी तो होगी ही ,  

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