देर सबेर ही सही भाजपा को समझ तो आया, की इस बार कानपुर से भाजपा की तो नही, हाँ उनके लोकसभा उम्मीदवार एम एम जोशी की हवा जरूर खराब थी. मोदी लहर में सांसद जी 2014 के लोकसभा चुनाव में बेड़ा तो पार कर ले जा पाए थे लेकिन इस बार उनके लिए यहां की सीट वैतरिणी पार करने सरीखी हो सकती थी. क्योंकि भारतीय जनता पार्टी के साथ ही संघ के कट्टर समर्थकों को भी उनका दिल्ली ना छोड़ पाना रास नही आ रहा था. और तो और उनका अपने संसदीय छेत्र को समय न दे पाना भी जनता से उनकी बेरुखी का कारण शुरू से ही बना रहा. खैर फिलहाल तो उनके लड़ने या लड़ाये जाने पर ही संदेह गहराया है.
कांग्रेस ने अपने पुराने प्रत्याशी पर दांव लगाया है. इसमें कोई शक नहीं था कि अगर bjp मुरली मनोहर जोशी को टिकट देती तो श्रीप्रकाश निकल सकते थे. ऐसे में भाजपा दूसरा प्रत्याशी उतारती है तो मुकाबला दिलचस्प हो सकता है. भाजपा कांग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी व मायावती का संयुक्त प्रत्याशी भी गड़ित का गांडीव चला सकता है.
वहीं जैसे कि कयास लगाए जा रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी मौजूदा राज्य सरकार में मंत्री सतीश महाना को कानपुर की लोकसभा सीट से चुनाव लड़ाएगी तो मामला एकतरफा रह सकता है. मतलब सीधे सीधे तौर पर फायदा भाजपा की ही झोली में जाता दिख रहा है.
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