Saturday, 30 March 2019

पढ़े जेल जर्नलिजम का रिव्यु सुरेश अवस्थी की कलम से


जरूर पढ़ें अंतरराष्ट्रीय कवि वरिष्ठ जर्नलिस्ट #सुरेशअवस्थी की कलम से #jailjournalism का #review***** "किसी भी रचनाकार को अपनी रचना प्रक्रिया से गुजरते हुए बार बार स्वयं से साक्षात्कार करना पड़ता है. उसकी संवेदनशीलता, विषयगत अनुभवों व भाषा पर सही और मज़बूत पकड़ उसे बड़ा रचनाकार बनाते हैं। मनीष दुबे के उपन्यास जेल जनर्लिज्म को पढ़ते हुए यह तथ्य पुख्ता होता है कि उनका संबंधित विषय का अनुभव संसार बहुत विस्तृत, संवेदनशीलता बहुत ही सघन और भाषा से संयत तथा अभिव्यक्ति को अपेक्षित धार देने वाली है। चूंकि मनीष एक सजग पत्रकार हैं, इसलिये उनका घटनाओं को लेकर कुछ अलग ही नजरिया रहता है। यही कारण है कि वह उपन्यास के हर पात्र की प्रस्तुति के साथ, न्याय कर सके हैं। उपन्यास के केंद्र में एक पत्रकार अमर यानी कि स्वयं लेखक है जिसे उसी के आसपास के लोग झूठे मामले में फंसा कर थाने और फिर थाने से जेल तक पहुंचा देते हैं।यहीं से शुरू होता है, लोकतंत्र पुलिस, न्यायतन्त्र , राजनीति और आम जनता के साथ खबरों का स्टिंग ऑपरेशन। अपने नाम के अनुरूप उपन्यास में जेल के भीतर, जेल नियमों के बार बार टूटने, कैदियों की सोच और संवेदना, खाकी वर्दी की क्रूरता, छोटे-छोटे लालच में बिखरती कड़क वर्दी की अकड़, कानून की उड़ती धज्जियां, कैदियों की आंखों में घर परिवार व रिश्तों के टूटते बिखरते सपने, कभी तय समय मे परिजनों से मुलाकात होने पर मन मस्तिष्क पर होती सुकून की बूंदाबांदी जैसे तमाम रेखाचित्र शब्दो की कूची से कागज़ के कैनवास पर बखूबी उंकेरने सफल रहा है लेखक। उपन्यास की भाषा आडंबरों से दूर और सहजता के निकट है। पुलसिया भाषा संवाद मे कहीं कहीं उन वर्जित शब्दों का प्रयोग भी सहजता के साथ हुआ है जो शब्द पुलिस और गुंडों की भाषा के सम्पुट माने जाते हैं। केंद्रीय पात्र अमर का अपनी प्रेयसी की याद में कविता गुनगुनाना, संमोहित करने वाला है। कुल मिला कर उपन्यास जेल जनर्लिज्म रोचक और सच की जमीन पर अनुभवों की फसल उगाने वाला तो है ही पाठकों जेल जीवन के विसंगतियों से भी रूबरू कराने वाला है। मुझे विस्वास है कि उपन्यास पाठको के बीच एक सम्मानजनक स्थान बनाएगा।" मेरी असीम शुभकामनाएं डॉ0 सुरेश अवस्थी (अंतरराष्ट्रीय कवि, राष्ट्रपति सम्मान प्राप्त शिक्षाविद व वरिष्ठ पत्रकार) #दैनिकजागरण नावेल पढ़ने के लिए #googleplaystore और #amazonkindle पर सर्च करें #jailjournalismnovel और पढ़े जो आज से पहले कभी नहीं पढा #गारंटीहैगुरु☺️💐💐 For more detail cont_ #9415626541

No comments:

Post a Comment