Thursday, 8 August 2013

फिल्म रिव्यू: सिक्सटीन


KRANTI PANDIT | NEWS WAR MEDIA
इस फिल्म की टैगलाइन पर जरा गौर कीजिए। सोलह बरस की साली उमर को सलाम..फिल्म ‘एक दूजे के लिए’ के सुपरहिट गीत से ली गयी इस लाइन से बाली को प्रत्यक्ष रूप से साफ कर साली कर दिया गया है। जाहिर है कि ऐसे खुराफाती आइडियाज इसी उम्र में आते हैं। लेकिन ये फिल्म किसी ऐसे आइडिया या सोलह बरस की अठखेलियों को नहीं दिखाती। ये फिल्म इशारा करती है कि तेज रफ्तार तकनीकी युग में देश के किशोर (एक खास वर्ग के) कहां जा रहे हैं। घर और बाहर उनके सामने किस तरह की चुनौतियां हैं। दिल्ली के एक बड़े पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले चार दोस्त तनीशा (वामिका गाबी), अनु (इजाबेल लेत्ते), निधि (महक मनवानी) और अश्विन (हाइफिल मैथ्यू) की डेली लाइफ कहीं न कहीं किसी न किसी तरह एक दूजे से जुड़ी हुई है। बावजूद इसके इन चारों को जिंदगी में किसी चीज की तलाश है। निधी को रोहन का साथ चाहिये, तनीशा एक परफेक्ट बंदे की तलाश में है, जबकि अश्विन, तनीशा पर मरता है और अनु बिंदास होते हुए भी एकदम अकेली है। तनीशा की जिंदगी में एक बड़ी तब्दीली विक्रम (कीथ सिक्वेरिया) के आने से आती है। लेकिन इससे उलट एक बड़ा और घातक बदलाव अश्विन की जिंदगी में आता है, जब उसके हाथों अपने ही पिता का खून हो जाता है। उधर, निधि प्रेगनेंट हो जाती है और अनु का एक अश्लील एमएमएस सामने आता है। अचानक से आये इन तेज घुमावों के लिए ये चारों तैयार नहीं होते और टूट जाते हैं। लेकिन एक नई सुबह की तरह इन्हें अपने परिवार का साथ मिलता है और ये संभल जाते हैं। फिल्म के चार अहम पात्रों की कहानी साधारण-सी होते हुए भी एक सोच की तरफ इशारा करती है। कुछ जरूरी बातों के समाधान भी दर्शाती है, जिसे टीनेजर्स के साथ-साथ अभिभावकों को भी जानने-समझने की जरूरत है। फिल्म के सभी कलाकार लगभग नए हैं। वामिका गाबी ने सबसे बेहतर अभिनय किया है। निर्देशक राजपुरोहित का कैमरा स्कूली लाइफ के इर्द-गिर्द ऐसे घूमा है, मानो वह सीसीटीवी से फुटेज इकट्ठा कर रहे हों। ‘सिक्सटीन’ एक सफल प्रयास तो नहीं, लेकिन एक ईमानदार प्रयास जरूर है। कलाकार: वामिका गाबी, कीथ सिक्वेरिया, इजाबेल लेत्ते, महक मनवानी, हाइफिल मैथ्यू निर्देशक-पटकथा: राजपुरोहित निर्माता: शैलेश सिंह व विश्वास जोशी कहानी: राजपुरोहित, पवन सोनी संगीत: प्रशांत पिल्लई, एडम एविल, एडी एविल

No comments:

Post a Comment