बेटी के नाम अमर का खत.......
प्यारी सूर्या, मुझे पता है और भली भाँति जान पा रहा हूँ...कि उम्र की इस दहलीज पर आपका मिसिंग प्वाइंट आखिर ठहरता कहाँ होगा। आपके अबोध मन की तीव्र चंचलता जब भी रूकती होगी, मुझे याद जरूर करती होगी। बेटा जन्म लेकर दिन बढ़ने कि प्रक्रिया के दौरान सबसे पहले बच्चा माँ बोलता है। अपनी माँ का नाम लेते लेते म.. कब प.. बन गया और प..कब पा...पा..बन कर मेरी अन्तरआत्मा मे समा गया आप नहीं ही जान पाये। आपकी इस बात के गवाह या तो आपकी माँ हैं या फिर वो, जिनका मै बेटा हूँ।
बेटा, अभी आप बहोत छोटे हो उस तड़प को महसूस करने के लिये...जिसे मै हर पल जी रहा हूँ। मालूम है आप जितने प्यारे हो आप की शरारतें भी उतनी ही प्यारी थीं। जो बाद के दिनों मे बढ़ती ही जा रहीं थीं। आपकी वो प्यारी सी मुस्कान जिस पर सैंकड़ो बार मर कर भी मै जी उठता था, सिर्फ एक बार ही देखकर। आपकी हर शरारत, आपका पर दिन, आपकी हर मुस्कुराहट मे आपके साथ ना रह पाने का विकट कष्ट है मुझे। कभी आपको छींक भी आती तो कलेजा हमारा काँपता, माँ-बाप होते ही ऐसे हैं। साढ़े आठ महीने की हो चुकीं थीं आप, जब धरती के झूठे..धूर्त टाईप तथाकथित भगवानो ने मुझे आप से दूर कर दिया। जहाँ हर समय जल्द से जल्द आप तक पहुँचने की उम्मीदों के सहारे, बहला पाता हूँ खुद को।
अच्छी तरह पता है मुझे की क्या खोया है मैने। बहोत प्यार करते हैं हम आपको। हर सम्भव प्रयास करके आपको आपके मुताबिक खुशनुमा माहौल देने को कटिबद्ध हैं हम। आपकी मम्मा जब कभी भी आपसे नाराज होकर हल्का फुल्का आपको पीट देतीं थीं तो यकीन मानना वो थप्पड़ मै खुद पर महसूस करता था। कभी नाराज होकर तो कभी याचनाओं से आपकी माँ को मनाता कि वो आपको मारें नहीं। पर यकीन जानो आपकी माँ सिर्फ रूलाने के लिए आपको मारतीं थीं। क्योंकी आप हो ही इतने प्यारे हंसते मे भी और रोते मे भी।
सूर्या, पता है आपको उस रात (15 दिसम्बर) जब मै आपको रोता हुआ छोड़कर अपनी तारीख पर जा रहा था, तो मन बार बार आपको याद कर भारी हुआ जा रहा था। आँसू बार बार बाहर आने को बेताब हो रहे थे, और देखो वही हुआ..जिसकी आशंका हो रही थी मुझे। जाकर वापस ही ना आ सका आप तक। बेटू बहोत याद आ रही है आपकी, आपको गले लगाने का मन कर रहा है...पर ये मुमकिन कहाँ अभी।
ईश्वर करे आप अपने भविष्य मे हर वो उंचाई छुओ, जो आप चाहो। जल्दी ही आप तक आने की उम्मीद के साथ....आपका पापा। लव यू सो मच बेटा।
आपका पापा
31.12.2015, 1:50 am
जेल जर्नलिज्म 2 से साभार.............
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