तुमने दूरदर्शन देखना छोड़ा,
प्राइवेट ऑपरेटरों ने 500 रुपये महीने निकाल लिए,
BSNL छोड़ा प्राइवेट वाले दोगुना लेने की तैयारी में ताल ठोंकने लगे हैं
, तुम सरकारी रेडियो आकाशवाणी नही सुनोगे तो प्राइवेट FM वाले तुम्हे एक ही गाना और सिर्फ गाना सुनाकर खुद करोडों कमाएंगे,
सरकारी रेल की बजाय "तेजस" जैसी कारपोरेट निजी ट्रेन के आने पर ताली पीटोगे तो उसका महंगा किराया भी तुम ही दोगे,
BPCL, इंडियन ऑयल जिस दिन नही रहेंगे उस दिन यही रिलायंस महंगा तेल बेचेगा,
सार्वजनिक बैंक नही रहेंगे तो प्राइवेट बैंक वाले तुम्हारे ही पैसे रखने के तुमसे चार्ज लेंगे,
सरकारी अस्पतालों के इलाज पर भरोसा नही करोगे तो प्राइवेट वाले मरते दम तक तुम्हारा पैसा चूसेंगे, जान जाएगी सो अलग,
सरकारी शिक्षा संस्थानों के कमजोर हो जाने पर प्राइवेट शिक्षा संस्थानों को तुम मुंहमांगी फीस दे ही रहे हो, ..
. यानि, कुल मिलाकर तुम लोग जो सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं को कमज़ोर करने की बहस या वकालत सोशल मीडिया पर करते हो, सरकारी संस्थाओं में भर्तियां न होने पर कई गुना काम के बोझ से दबे कर्मचारियों को गाली देते हो और उन्हें नीचा साबित करते हो,
इन सभी में कहीं न कहीं नुकसान तुम्हारा ही है... सरकारी संस्थाओं और उनके कर्मचारियों का सहयोग कीजिए,
उन संस्थाओं को आगे बढ़ाने में मदद कीजिये... इसी में राष्ट्रहित भी है और आपका हित भी...


वरिष्ठ अधिवक्ता मदन तिवारी की fb वॉल से साभार
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