Monday, 23 May 2011

garmi ka kahar aur kanya chhedak tatwa

अब क्या बताऊँ बतौर एक पत्रकार यूँ तो हर समय कुछ कहने या कुछ बोलनेकी आदत तो होती ही है , पर सवाल ये की आखिर कहूँ किस्से , चलो ब्लॉग पे ही कुछ कहता हूँ , इस समय मेरा जो भी कुछ चल रहा है वो सहिमायनो ममेरा struggle ऐसा मुझे लगता है इस मीडिया की नौकरी में जाने कितने पापड़ बेले और न जनेकित्नेबेलने पड़ेंगे नहीं पता , लेकिन हाँ घूम खूब रहा हूँ इन दिनों मई , अब घुमते घुमते ये देखा की कभी सड़क पर चलती हुई कोई लड़की निकलती है तो लोग आगे चलते हुए भी उसे पलट कर्देख्तेहाई चहेअगेउन्कि bike की टक्कर ही क्यों न हो जाये , ऐउसा क्यूँ मेरे खुराफाती दिमाग ने जानते हैं क्या सोचा चलिए बताता हूँ , वो ये की सायद वे लोग यह सोचते होंगे की " देख लू नहीं तो कोई हूर छुट न जाये " भाई मुझे तो यही लगता है आप अपनी बताये

2 comments:

  1. bhai kitni behtrin baat kahi hai mazaaa gaya , rajat .newdelhi

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  2. hanyar maine aaj takyebaat sochihinahin,yahi facthai,nitin sharma new delhi

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