Sunday, 19 June 2011

साप्ताहिक कुकुरमुत्ते

एक तो आजकल इतने साप्ताहिक अखबार हो गए हैं जो जगह जगह कुकुरमुत्तों की तरह उग आते हैं ! महीने पंद्रह दिन में किसी पे प्रेसर बनाने के लिए छाप दिया या किसी छुटभैये की शान में कशीदे काढने वाले ये अखबार और इनके रिपोर्टर ! ये तो देश भर में हैं और तो और कस्बाई व ग्रामीण छेत्रो में तो किसी रिश्तेदार को ध्यान में रखते हुए लोग प्रेस किन गरिमा लूटते है ! और पोलिसे तो रोकेगी ही प्रेस वालों को ताकि फर्जी लोगो को पकडे सख्ती दिखाए , सायद थोडा मानसिक प्रेसर बड़ों पर भी हो ! और रेहड़ी , ठेली लूटने वाले ये सरकार के सरकारी पत्तेचात कुछ नहीं कर सकते ! इस विषय पर मुझे लगता है , अगर इतना बड़ा मुद्दा है तो उपाय भी मीडिया को निकलना होगा !   साप्ताहिक कुकुरमुत्ते

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