Friday, 24 June 2011

जूतों के लाइव और मेरे जूते गुमशुदा


---------- Forwarded message ----------
From: manish kumar <mkkumar893@gmail.com>
Date: 2011/6/15
Subject: जब दूर गए मेरे जूते
To: bhadas4media <bhadas4media@gmail.com>


जूतों के लाइव और मेरे जूते गुमशुदा

बीते कुछ समय से मैं कंगाली काट रहा हूँ ! पिछले दिनों भड़ास ने मेरी आप बीती " आजाद के गौरी ने हडपे मेरे 35 ,000 रुपयेप्रकाशित की ! कई लोगो के विचार आए , कई फ़ोन आए मेरे पास ! इन सब आई - गयी बातों के बीच सबसे पहले मै भड़ास का तहेदिल से शुक्रगुजार हूँ !  जिन्होंने मुझे या मेरी कलम को अपने दिनोदिन नामचीन होते पोर्टल में जगह दी ! अपनी बात रखने का मौका दिया ! थेंकयू !

भड़ास ने जिस दिन मेरी स्टोरी छापी मन को थोड़ी तसल्ली लाजिमी थी ! पर यह तसल्ली दूर तक न जा सकी ! क्योकि किसी ने मेरे इकलौते जूते के जोड़े को मुझसे दूर कर दिया था ! कंगाली में अत गीला , और उस में थोडा पानी जादा हो गया !

आज जब देश विदेश में बड़ी - बड़ी हस्तियों पर जूते चल रहे हैं ! जूते पे स्क्रोल , जूते पे फ़ोनों , जूतों  के  लाइव के टाइम में जूते मंहगे हैं या सस्ते यह कहना मेरे लिए बेकार की बात होगी ! क्योकि भाई अपन न तो मंहगे में न सस्ते में ! सोचा चलो कहीं से व्यवस्था कर के इसे भी झेल लूँगा ! पर यकीन मानिये मैंने पीठ पीछे भी उस सक्श को  भला - बुरा नहीं कहा ! जिसने मेरे जूते मुझसे दूर किये थे ! क्या पता वो शायद  मुझसे भी जादा कंगाल हो ! मुझे सुबह अपने ऑफिस के लिए निकलना था ! और पहनने के लिए मेरे पास केवल 45 रुपये वाली हवाई चप्पल बची थी ! मैंने बैग उठाया और चप्पल पहन कर ऑफिस के लिए निकल पड़ा ! थोड़ी शर्मिंदगी के बीच मन में सवाल उठ रहे थे ! जाऊ की न जाऊ , पर नई - नई नौकरी है , कहीं चली गई तो और लाले न पड़ जाये ! पत्रकारिता निष्ठुर जो ठहरी ! चलो यार चलते हैं !
  गली से मार्केट  , मार्केट  से सड़क , सड़क से बस आदि जगहों पर लोगो ने मेरी चप्पल और मै  उन सबके पैरों में पड़े ब्रांड्स देख रहा था ! कोई वुडलैंड , कोई रीबोक , तो कहीं पुमा के ज़माने में मेरी  हवाई की क्या चल !
खैर जैसे - तैसे ऑफिस पहुंचा ! एक दो लोगो खासकर ऑफिस की कन्याकर्मियों के सामने हीनता का शिकार हुआ ! किनारे  की एक कुर्सी में तसरीफ रखकर कलम को धार देने लगा ! कलम घिसने में मन नहीं लगा ! क्योकि सारे टोपिक्स , सारे स्टोरी आईडिया , साड़ी स्क्रिप्ट तो मेरे जूते ले गए थे !
 मनीष दुबे - नई दिल्ली  , 08130073382  ईमेल - mkkumar893 @gmail .com

No comments:

Post a Comment