हाथ में तिरंगा, जुबां पर अन्ना और मन में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई की तमन्ना लिये मंगलवार को लोगों की टोली दिल्ली की सड़कों पर नजर आ रही थी। अन्ना हजारे व उनके सहयोगियों की गिरफ्तारी की घटना ने आग में घी का काम किया। मैं हूं अन्ना.. मैं हूं अन्ना..। कितने को आप करेंगे गिरफ्तार? लोग सीधे पुलिस से पूछ रहे थे। अन्ना का कसूर क्या है यह हमें बताएं? उन्हें क्यों गिरफ्तार किया गया? लोग सड़कों से गुजरने वालों से पूछ रहे थे कि क्या आप भ्रष्टाचार से पीडि़त नहीं हैं? लोगों में उत्साह इस कदर था कि दिल्ली में सभी मार्गो पर भ्रष्टाचार के खिलाफ लोग दिखाई दे रहे थे। पुलिस अपना काम करने में मशगूल थी और लोगों को इकट्ठा नहीं होने दे रही थी। राजघाट व जेपी पार्क के पास पुलिस का जबरदस्त पहरा था। समूह में जो जहां मिल जाता उसे वहीं से उठाकर बसों से छत्रसाल स्टेडियम में बनाई अस्थायी जेल भेजा जा रहा था। जैसे-जैसे दिन बढ़ता गया भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़कों पर लोग एकजुट होते रहे। राजघाट, इंडिया गेट, जेपी पार्क, मयूर विहार, पीतमपुरा, बवाना, नरेला.. दिल्ली के सीमावर्ती क्षेत्र सभी जगह लोग सरकारी लोकपाल बिल के खिलाफ नारे लगा रहे थे। जन लोकपाल बिल के समर्थन में लोगों का कहना था कि जिस तरह से सरकारी लोकपाल बिल सदन में रखा गया है उसी तरह से सिविल सोसायटी की तरफ से तैयार जन लोकपाल बिल भी सदन में रखना चाहिए। फिर सांसद इस पर चर्चा करें। क्या बच्चे, क्या बुजुर्ग और क्या जवान, सभी सड़क पर भ्रष्टाचार के खिलाफ। जन लोकपाल बिल के समर्थन में एक स्कूली बच्चे का कहना था कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन में अन्ना के साथ है। दस साल बाद जब वह मुख्यधारा से जुड़ेंगे तो उन्हें परेशानी नहीं होगी। शैक्षणिक संस्थानों के छात्र भी अन्ना के समर्थन में निकल रहे थे। स्कूल, कॉलेज, विभिन्न शैक्षिणिक संस्थानों के छात्र दिल्ली व एनसीआर से आए थे। हाथों में तिरंगा व सिर पर गांधी टोपी लगाए सिविल लाइंस से छत्रसाल तक का ढाई घंटे का सफर पैदल ही तय किया। मकसद भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों को एकजुट करना था।
छत्रसाल पहुंचने वाले सभी मागरें चाहे वह माल रोड हो, डीयू नार्थ क्रांति चौक या तानसेन मार्ग या फिर मॉडल टाउन, सड़कों पर तिरंगा लिए छोटे छोटे समूह में लोग प्रदर्शन करते और 'अन्ना तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं' के नारे लगाते नजर आ रहे थे। गिरफ्तारी के लिए अस्थायी जेल बनाए गए छत्रसाल स्टेडियम का नजारा ही कुछ और था। स्टेडियम भर जाने के बाद भी लोग बाहर गिरफ्तारी देने को तैयार थे।
सिविल लाइंस में अलीपुर रोड स्थित जीओ मेस में अन्ना को हिरासत में लेने के बाद सुबह के करीब सवा नौ बजे लाया गया, तो यहां अन्ना समर्थकों का हुजूम लगना शुरू हो गया। यहां से लगातार गिरफ्तारी होती रही।
राजघाट व जेपी पार्क पर सोमवार से पुलिस का पहरा शुरू हो गया था। सोमवार रात गहराने के साथ ही पुलिस बलों व बेरिकेटिंग की संख्या भी बढ़ने लगी। सुबह सात बजे तक तो यह क्षेत्र युद्ध का मैदान नजर आ रहा था? भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोग आते गए और पुलिस उन्हें बसों में भरकर छत्रसाल स्टेडियम भेज देती।
शाम के चार बजे प्रगति मैदान के पास भ्रष्टाचार के खिलाफ भले ही रैली निकालने की स्वीकृति न दी हो मगर हजारों की संख्या में आए छात्र-छात्राओं ने प्रदर्शन कर यह सिद्ध कर दिया कि उनके मन में कितना आक्रोश हैं। पुलिस ने प्रगति मैदान के पास से ही सभी को हिरासत में ले लिया।
छत्रसाल पहुंचने वाले सभी मागरें चाहे वह माल रोड हो, डीयू नार्थ क्रांति चौक या तानसेन मार्ग या फिर मॉडल टाउन, सड़कों पर तिरंगा लिए छोटे छोटे समूह में लोग प्रदर्शन करते और 'अन्ना तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं' के नारे लगाते नजर आ रहे थे। गिरफ्तारी के लिए अस्थायी जेल बनाए गए छत्रसाल स्टेडियम का नजारा ही कुछ और था। स्टेडियम भर जाने के बाद भी लोग बाहर गिरफ्तारी देने को तैयार थे।
सिविल लाइंस में अलीपुर रोड स्थित जीओ मेस में अन्ना को हिरासत में लेने के बाद सुबह के करीब सवा नौ बजे लाया गया, तो यहां अन्ना समर्थकों का हुजूम लगना शुरू हो गया। यहां से लगातार गिरफ्तारी होती रही।
राजघाट व जेपी पार्क पर सोमवार से पुलिस का पहरा शुरू हो गया था। सोमवार रात गहराने के साथ ही पुलिस बलों व बेरिकेटिंग की संख्या भी बढ़ने लगी। सुबह सात बजे तक तो यह क्षेत्र युद्ध का मैदान नजर आ रहा था? भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोग आते गए और पुलिस उन्हें बसों में भरकर छत्रसाल स्टेडियम भेज देती।
शाम के चार बजे प्रगति मैदान के पास भ्रष्टाचार के खिलाफ भले ही रैली निकालने की स्वीकृति न दी हो मगर हजारों की संख्या में आए छात्र-छात्राओं ने प्रदर्शन कर यह सिद्ध कर दिया कि उनके मन में कितना आक्रोश हैं। पुलिस ने प्रगति मैदान के पास से ही सभी को हिरासत में ले लिया।
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