कवी पुलिस और मै
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पुलिस के लिए क्या कहा ? गुंडा कहा , बदमाश कहा की अपराधियों का संगठित गिरोह कहा , इससे मुझे कोई मतलब नहीं ! हिन्दुस्तानी अवाम भी उनके बारे में क्या कहती है , उससे भी मुझे कोई लेना-देना नहीं है ! ऐसा भी हो सकता है की आम जान को पुलिस से कोई सिकायत न हो, पर मुझे है वो भी खास सायरो और कवियों को लेकर !
कवी और सायर महाशय खुलेआम अपनी कविताओ और सायरी में कानून विरोधी , ऊट पटांग , भड़काऊ और अनैतिक बाते लिखते और पढ़ते रहते है और पुलिस वाले हैं की उनके विरुद्ध कार्यवाही करने के बदले वाह-वाह , इरशाद - इरशाद चिल्लाते वन्स मोर की आवाज रेंकते रहते हैं ! अरे भाई कानून वालो आखिर इन सिरफिरे कवियों और सायरो ने तुमको कितनी बक्शीश दी है , कितना उत्कोच दिया है जो इतनी मक्खन चुपड़ी कर रहे हो ! मै पूछता हूँ साहित्य के नाम पर इनकी घोर आपत्तिजनक बातो पर भी आम पब्लिक के साथ तालिय पीटते क्या तुम्हारी आत्मा के अन्दर थोड़ी बहुत भी खदबदाहट या झूमाझटकी नहीं होती ? हमसे आपत्तिजनक उदाहरण पूछते है ! बताने पर उतरेंगे तो गीता और रामायण भी छोटे पड़ जायेंगे !
अच्छा ठीक है , ठीक है बहुत खुजली हो रही है तो सुनो ! कोई कविऊ महासय है की सायर उनकी नायिका कह रही है - " मोहे पनघट पे नंदलाल छेड़ गयो रे , मोरी नाजुक कालिया मरोड़ गयो रे " अब यह नन्दलाल नाम का बदमाश सरेआम एक अबला लड़की से छेड़छाड़ कर रहा है , कलाई तक मरोड़ रहा है ! सायर को भी पता है वह एकमात्र गवाह है ! पकड़ो उसको गवाही के लिए ! इस छेडू किस्म के लफंगे नन्दलाल को गर्दानियते हुए FIR दर्ज कर अन्दर करिए और कोर्ट में पेश करिए ! अब पुलिस वालो का जो सही काम है वह तो आपसे होता नहीं है ! उलटे वाह वाह चिल्लाते हुए तालिय बजाते रहोगे ! एक दूसरी हसीन जवान लड़की की सिकायत भी सुनिए -" मोरी चुनरी न छीनो घनश्याम , कोई देखा तो हो जाउंगी बदनाम " ! बताओ एक भोली भली खूबसूरत जवान लड़की को अकेली देखकर पता नहीं यह कौन सख्श है घनश्याम जो उसकी चुनरी तक खीच रहा है पर पुलिस वालों को कहा इतनी फुरसत है की ऐसे असामाजिक तत्व को पकड़कर दो लापडा लगते हुए थाने में बंद करे ! ऐसे ही असामाजिक तत्वों के कारण आज समाज गर्त में जा रहा है पर फुरसत किसको है !
अब एक और दूसरी लड़की की दुर्दशा की भी आत्मस्वीकृति सुन लीजिये ! अभागी कह रही है - " वो मेरी इज्जत से रोज खेलते रहे , तुम मौन दर्शको की तरह देखते रहे " ये सीधा सीधा पुलिस वालो पर अछेप लगता है ! कोई साख - रसूख वाला नेता किस्म का आदमी है जो उस बेचारी गरीब लड़की को अपनी हवास का शिकार बना रहा है और पुलिस है की दर के मरे कुछ कर नहीं रही है ! सीधा बलात्कार का मामला बनता है ! पता नहीं ये श्याम , घनश्याम , नन्दलाल , कन्हैया जैसे लोगो पर पुलिस वाले क्यों इतने मेहरबान है !वे निरंतर अपराध करते चले जा रहे है , यहाँ तक की बलात्कार पर उतर आए हैं परन्तु यह पुलिस डिपार्टमेंट है की इरशाद इरशाद करते हुए लमलेट हुआ जा रहा है !
इधर एक नायिका है , वो भी खुलेआम सिकायत पर अमादा है - " ह्रदय को मेरे चुरा वो , मुस्कुराते हुए जा रहे है " बेशर्मी की हद है चोरी भी करी ऊपर से मुस्कुराते हुए जा भी रहा है ! अजीब दुस्साहसी किस्म का जीव है ! पता नहीं कौन से गृह से आया है ? देख लीजिये नैतिकता का कैसा पतन है ! अरे पुलिस वाले भैया , जादा मुरव्वत करने की जरुरत नहीं है ! पकडिये उस दुस्त को और लगाइए उसके पिछवाड़े दो डंडे और ले जाइये धकियाते थाने ! खिलाइए हवालात की हवा ! जरा एक कवी महाशय की भी सुन लीजिये - " इस निर्दि पापी दुनिया से , आओ सजनी दूर चले " ! देख लीजिये सीधा सीधा लड़की भागने के चक्कर में है ! लड़की को भागकर दुस्त कही कलकत्ता , मुंबई ले जायेगा कुछ दिन मौज मस्ती करेगा उसके गहने जेवर बेचेगा और उसको वही बेशहरा छोड़ चुपके से भाग आयेगा ! अब ऐसे लफंगों पर लगाइए न इंडियन पेनल कोर्ट की धारा तीन सौ पञ्च या और कोई ताकि उसे कुछ सबक मिले ! अब ये सब आप पुलिस वालो से तो होता नहीं , चौराहे पर बेचारे ड्राईवर - खलासी से रोज सौ - पचास का जजिया वसूलने खड़े रहेंगे !
जरा इस कवी की भी बात सुनिए ये फार्म रहे हैं - " चैन नहीं है दिनको , रातें नींद नहीं लगती , बैरिन नजर तुम्हारी लगी हमें " ! कंप्यूटर , लैपटॉप के इस प्रोग्रेसिव ज़माने में अंधविश्वास से भरी नजर नजर वाली बात उठाई गई है ! सीधा टोनही प्रताड़ना का मामला बनता है ! अब थानों में यो ही बैठे सोते रहोगे की इन अन्धविसवासी कवी महासय को गिरफ्तार करके अंडी का तेल लगाकर कुछ सिकाई - उकाई भी करोगे ! एक और सायर है जो खुलेआम कह रहे है -" जम चल्काए चलो , मस्तिय लुटाये चलो , मौका जहा भी मिले ,लैब से लगाये चलो ! उध्द गई न मध्निशेध की बखिया ! कर दी कानून की ऐसी तैसी ! छटी ठोककर सार्वजनिक स्थल पर पीने की बात चल रही है और पुलिस है की बैठी हस रही है ! इसी लिए देश तरक्की नहीं कर रहा है ! ऐसी ही अफलातूनी बातो से प्रेरणा प्राप्त करके जवान छोकरे पीने किउमर बाईस साल करने के लिए हल्ला मचा रहे है ! हो गया न देश चौपट ........!
हाथपर हाथ धरे कब तक बैठे रहेंगे पुलिस वाले भाई , जरा जागिये , कुछ समाज का ख्याल करिए ! रोज कितना पतन हो रहा है ! इधर एक और सायर है , जनाब लिखते है - " तेरे दो नैनो ने ठगा ठगोरी कब जानेगी " ठगी का मामला बन रहा है , तो फिर कब बनाइएगा?ऐसे ही सुधरेगा समाज ...! बेचारे अन्ना ही देश और समाज सुधरने का ठेका लिए है क्या ? दुसरे पहुचे हुए कवी की भी बात सुनिए - " तोड़ दोतुम फोड़ दो तुम , पाप के धन केभाव को " ! इस तोड़ फोड़ पर भी कार्यवाही नहीं करेंगा क्या ? अब इन सायर महोदय की भी सुनिए - " कल जुलूस था अश्क , अह का , आंसू की रैली है आज , परसों भूख की आमसभा थी , आया कैसा गजब सुराज " ! सच बताइए इस रैली , चक्का - जम , भूख हड़ताल की परमिसन ली थी क्या , इस दुस्त सायर ने बस प्रशासन को तंग करो , यही अब आजादी का मतलब है !
अब इनको देखिये , इन्होने तो हद ही कर दी ! कह रहे है - " जो खेलेगा मेरी माती की इज्जत से , उसका मै लोहू माँ के चरणों में चढाऊंगा" ! सीधे सीधे मर्डर की चुनौती ! अटेम्प्ट टू मर्डर में जो धारा लगती हो , उसे लगाओ और अन्दर करो इस नामाकूल सायर को ! ये कविता और सायरी की आड़ में कुछ भी अंट संट बकते रहे और पुलिस डिपार्टमेंट मौन साढ़े रहे , यह तो ठीक नहीं ! इसे पुलिस का पछपत नहीं तो और क्या कहेंगे ?
अब मेरा ही ले लो , मै किसी लड़की को देखकर मुस्कुरा भर दूँ , फिर देख लो मुझे तत्काल गिरेबान पकड़ कर घसीटते हुए थाने ले जाओगे और कहोगे लौंडे को मस्ती चढ़ी है ! फिर पूजा पाठ का कार्यक्रम सुरु कर दोगे ! और ये दुस्त सायर - कवी , ये क्या तुम्हारे दामाद लगते है या ससुर की इनकी सायरी पर वन्स मोर वन्स मोर की आवाज मरते हुए तालिय पिटते रहते हो !
मनीष दुबे , 08130073382
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पुलिस के लिए क्या कहा ? गुंडा कहा , बदमाश कहा की अपराधियों का संगठित गिरोह कहा , इससे मुझे कोई मतलब नहीं ! हिन्दुस्तानी अवाम भी उनके बारे में क्या कहती है , उससे भी मुझे कोई लेना-देना नहीं है ! ऐसा भी हो सकता है की आम जान को पुलिस से कोई सिकायत न हो, पर मुझे है वो भी खास सायरो और कवियों को लेकर !
कवी और सायर महाशय खुलेआम अपनी कविताओ और सायरी में कानून विरोधी , ऊट पटांग , भड़काऊ और अनैतिक बाते लिखते और पढ़ते रहते है और पुलिस वाले हैं की उनके विरुद्ध कार्यवाही करने के बदले वाह-वाह , इरशाद - इरशाद चिल्लाते वन्स मोर की आवाज रेंकते रहते हैं ! अरे भाई कानून वालो आखिर इन सिरफिरे कवियों और सायरो ने तुमको कितनी बक्शीश दी है , कितना उत्कोच दिया है जो इतनी मक्खन चुपड़ी कर रहे हो ! मै पूछता हूँ साहित्य के नाम पर इनकी घोर आपत्तिजनक बातो पर भी आम पब्लिक के साथ तालिय पीटते क्या तुम्हारी आत्मा के अन्दर थोड़ी बहुत भी खदबदाहट या झूमाझटकी नहीं होती ? हमसे आपत्तिजनक उदाहरण पूछते है ! बताने पर उतरेंगे तो गीता और रामायण भी छोटे पड़ जायेंगे !
अच्छा ठीक है , ठीक है बहुत खुजली हो रही है तो सुनो ! कोई कविऊ महासय है की सायर उनकी नायिका कह रही है - " मोहे पनघट पे नंदलाल छेड़ गयो रे , मोरी नाजुक कालिया मरोड़ गयो रे " अब यह नन्दलाल नाम का बदमाश सरेआम एक अबला लड़की से छेड़छाड़ कर रहा है , कलाई तक मरोड़ रहा है ! सायर को भी पता है वह एकमात्र गवाह है ! पकड़ो उसको गवाही के लिए ! इस छेडू किस्म के लफंगे नन्दलाल को गर्दानियते हुए FIR दर्ज कर अन्दर करिए और कोर्ट में पेश करिए ! अब पुलिस वालो का जो सही काम है वह तो आपसे होता नहीं है ! उलटे वाह वाह चिल्लाते हुए तालिय बजाते रहोगे ! एक दूसरी हसीन जवान लड़की की सिकायत भी सुनिए -" मोरी चुनरी न छीनो घनश्याम , कोई देखा तो हो जाउंगी बदनाम " ! बताओ एक भोली भली खूबसूरत जवान लड़की को अकेली देखकर पता नहीं यह कौन सख्श है घनश्याम जो उसकी चुनरी तक खीच रहा है पर पुलिस वालों को कहा इतनी फुरसत है की ऐसे असामाजिक तत्व को पकड़कर दो लापडा लगते हुए थाने में बंद करे ! ऐसे ही असामाजिक तत्वों के कारण आज समाज गर्त में जा रहा है पर फुरसत किसको है !
अब एक और दूसरी लड़की की दुर्दशा की भी आत्मस्वीकृति सुन लीजिये ! अभागी कह रही है - " वो मेरी इज्जत से रोज खेलते रहे , तुम मौन दर्शको की तरह देखते रहे " ये सीधा सीधा पुलिस वालो पर अछेप लगता है ! कोई साख - रसूख वाला नेता किस्म का आदमी है जो उस बेचारी गरीब लड़की को अपनी हवास का शिकार बना रहा है और पुलिस है की दर के मरे कुछ कर नहीं रही है ! सीधा बलात्कार का मामला बनता है ! पता नहीं ये श्याम , घनश्याम , नन्दलाल , कन्हैया जैसे लोगो पर पुलिस वाले क्यों इतने मेहरबान है !वे निरंतर अपराध करते चले जा रहे है , यहाँ तक की बलात्कार पर उतर आए हैं परन्तु यह पुलिस डिपार्टमेंट है की इरशाद इरशाद करते हुए लमलेट हुआ जा रहा है !
इधर एक नायिका है , वो भी खुलेआम सिकायत पर अमादा है - " ह्रदय को मेरे चुरा वो , मुस्कुराते हुए जा रहे है " बेशर्मी की हद है चोरी भी करी ऊपर से मुस्कुराते हुए जा भी रहा है ! अजीब दुस्साहसी किस्म का जीव है ! पता नहीं कौन से गृह से आया है ? देख लीजिये नैतिकता का कैसा पतन है ! अरे पुलिस वाले भैया , जादा मुरव्वत करने की जरुरत नहीं है ! पकडिये उस दुस्त को और लगाइए उसके पिछवाड़े दो डंडे और ले जाइये धकियाते थाने ! खिलाइए हवालात की हवा ! जरा एक कवी महाशय की भी सुन लीजिये - " इस निर्दि पापी दुनिया से , आओ सजनी दूर चले " ! देख लीजिये सीधा सीधा लड़की भागने के चक्कर में है ! लड़की को भागकर दुस्त कही कलकत्ता , मुंबई ले जायेगा कुछ दिन मौज मस्ती करेगा उसके गहने जेवर बेचेगा और उसको वही बेशहरा छोड़ चुपके से भाग आयेगा ! अब ऐसे लफंगों पर लगाइए न इंडियन पेनल कोर्ट की धारा तीन सौ पञ्च या और कोई ताकि उसे कुछ सबक मिले ! अब ये सब आप पुलिस वालो से तो होता नहीं , चौराहे पर बेचारे ड्राईवर - खलासी से रोज सौ - पचास का जजिया वसूलने खड़े रहेंगे !
जरा इस कवी की भी बात सुनिए ये फार्म रहे हैं - " चैन नहीं है दिनको , रातें नींद नहीं लगती , बैरिन नजर तुम्हारी लगी हमें " ! कंप्यूटर , लैपटॉप के इस प्रोग्रेसिव ज़माने में अंधविश्वास से भरी नजर नजर वाली बात उठाई गई है ! सीधा टोनही प्रताड़ना का मामला बनता है ! अब थानों में यो ही बैठे सोते रहोगे की इन अन्धविसवासी कवी महासय को गिरफ्तार करके अंडी का तेल लगाकर कुछ सिकाई - उकाई भी करोगे ! एक और सायर है जो खुलेआम कह रहे है -" जम चल्काए चलो , मस्तिय लुटाये चलो , मौका जहा भी मिले ,लैब से लगाये चलो ! उध्द गई न मध्निशेध की बखिया ! कर दी कानून की ऐसी तैसी ! छटी ठोककर सार्वजनिक स्थल पर पीने की बात चल रही है और पुलिस है की बैठी हस रही है ! इसी लिए देश तरक्की नहीं कर रहा है ! ऐसी ही अफलातूनी बातो से प्रेरणा प्राप्त करके जवान छोकरे पीने किउमर बाईस साल करने के लिए हल्ला मचा रहे है ! हो गया न देश चौपट ........!
हाथपर हाथ धरे कब तक बैठे रहेंगे पुलिस वाले भाई , जरा जागिये , कुछ समाज का ख्याल करिए ! रोज कितना पतन हो रहा है ! इधर एक और सायर है , जनाब लिखते है - " तेरे दो नैनो ने ठगा ठगोरी कब जानेगी " ठगी का मामला बन रहा है , तो फिर कब बनाइएगा?ऐसे ही सुधरेगा समाज ...! बेचारे अन्ना ही देश और समाज सुधरने का ठेका लिए है क्या ? दुसरे पहुचे हुए कवी की भी बात सुनिए - " तोड़ दोतुम फोड़ दो तुम , पाप के धन केभाव को " ! इस तोड़ फोड़ पर भी कार्यवाही नहीं करेंगा क्या ? अब इन सायर महोदय की भी सुनिए - " कल जुलूस था अश्क , अह का , आंसू की रैली है आज , परसों भूख की आमसभा थी , आया कैसा गजब सुराज " ! सच बताइए इस रैली , चक्का - जम , भूख हड़ताल की परमिसन ली थी क्या , इस दुस्त सायर ने बस प्रशासन को तंग करो , यही अब आजादी का मतलब है !
अब इनको देखिये , इन्होने तो हद ही कर दी ! कह रहे है - " जो खेलेगा मेरी माती की इज्जत से , उसका मै लोहू माँ के चरणों में चढाऊंगा" ! सीधे सीधे मर्डर की चुनौती ! अटेम्प्ट टू मर्डर में जो धारा लगती हो , उसे लगाओ और अन्दर करो इस नामाकूल सायर को ! ये कविता और सायरी की आड़ में कुछ भी अंट संट बकते रहे और पुलिस डिपार्टमेंट मौन साढ़े रहे , यह तो ठीक नहीं ! इसे पुलिस का पछपत नहीं तो और क्या कहेंगे ?
अब मेरा ही ले लो , मै किसी लड़की को देखकर मुस्कुरा भर दूँ , फिर देख लो मुझे तत्काल गिरेबान पकड़ कर घसीटते हुए थाने ले जाओगे और कहोगे लौंडे को मस्ती चढ़ी है ! फिर पूजा पाठ का कार्यक्रम सुरु कर दोगे ! और ये दुस्त सायर - कवी , ये क्या तुम्हारे दामाद लगते है या ससुर की इनकी सायरी पर वन्स मोर वन्स मोर की आवाज मरते हुए तालिय पिटते रहते हो !
मनीष दुबे , 08130073382
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