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पता नहीं एप्पल कंपनी ने माइक्रोमैक्स के इस फोन को नोटिस किया है या नहीं लेकिन कंपनी के हवाले से जो समाचार आ रहे हैं वे बता रहे हैं कि भारत जैसे मोबाइल बाजार में माइक्रोमैक्स जैसी कंपनियों की मजबूती से एप्पल जैसी धुरंधर कंपनी भी परेशान है। शायद यही कारण है कि एप्पल द्वारा अब 100 से 200 डॉलर की कीमत के बीच का सस्ता आईफोन उभरते बाजारों में लांच करने की तैयारी की जा रही है। लेकिन वह तो जब होगा तब। भारत की एक सस्ती मोबाइल कंपनी माइक्रोमैक्स ने हाल में ही जो स्मार्टफोन भारतीय बाजार में जारी किया है उसे आप आम आदमी का अपना आईफोन या फिर आम आदमी का सस्ता गैलेक्सी नोट कह सकते हैं।
भारत के हाई एण्ड मोबाइल मार्केट में मुख्य रूप से तीन कंपनियों के स्मार्टफोन मौजूद हैं। एप्पल का आईफोन, सैंमसंग के गैलेक्सी नोट सीरीज और एस सीरीज के स्मार्ट फोन तथा नोकिया के ल्यूमिया सीरीज के फोन। भारत में स्मार्टफोन का जितना हाईएण्ड सेगमेन्ट हैं उसमें ब्लैकबेरी के बिजनेस फोन को अलग कर दें तो इन्हीं तीन कंपनियों की दावेदारी है। सोनी एरिक्सन और मोटोरोला जैसी मोबाइल कंपनियां अभी भी भारत के स्मार्टफोन बाजार में कोई खास मौजूदगी नहीं दिखा पाई हैं। लेकिन फर्श से शुरू हुई माइक्रोमैक्स कंपनी ने भारतीय बाजार में कीमत की वह नब्ज पकड़ ली जो आपकी सफलता और असफलता तय करती है और देखते ही देखते वह देश की तीसरी सबसे बड़ी मोबाइल कंपनी बन गई।
वित्तीय वर्ष 2011-2012 में 4000 करोड़ की कंपनी बन चुकी माइक्रोमैक्स ने बीते एक साल में न केवल टेबलेट मार्केट में प्रवेश किया है बल्कि उसने इलेक्ट्रानिक मार्केट में भी अपने प्रोडक्ट लांच किये हैं, लेकिन मोबाइल उसका प्राइमरी मार्केट है और अपने इसी प्राइमरी मार्केट में उसने दिसंबर में जिस माइक्रोमैक्स कैनवास 2 (ए110) फोन लांच किया है, उसे आम आदमी का आईफोन कहा जा सकता है। इसके कई कारण है।
कैनवास सीरीज में पहले माइक्रोमैक्स ने जो ए100 फोन लांच किया था उसमें कई खामियां थीं। सबसे बड़ी खामी थी, फ्रंट स्क्रीन पर टच बटन नदारद थे। इसके कारण मोबाइल को आपरेट करने के लिए उसके स्क्रीन के जरिए ही उसे आपरेट किया जा सकता था। कैमरे की क्वालिटी भी बहुत अच्छी नहीं थी। इसलिए माइक्रोमैक्स ने कुछ मूलभूत सुधार करके जिस कैनवास2 को भारतीय बाजार में उतारा है वह कहीं से सैमसंग के गैलेक्सी नोट2 या फिर आईफोन को टक्कर देने के लिए सस्ता लेकिन मजबूत विकल्प नजर आता है।
माइक्रोमैक्स ने कैनवास-2 में एन्डराइड आइसक्रीम सैंडविच ओएस का इस्तेमाल किया है जिसे एन्डराइड के लेटेस्ट जेली बीन ओएस से अपग्रेड किया जा सकता है। यह माइक्रोमैक्स की परेशानी नहीं है बल्कि यह एन्डराइड का अपना अपग्रेडिंग सिस्टम है। इसके साथ ही माइक्रोमैक्स ने अपने डिवाइस के साथ सबसे बड़ी शिकायत बैटरी बैक अप को भी दूर करने की कोशिश की है। कैमवास-2 में 2000 एमएएच की बैटरी लगाई गई है जो दावों से अलग कम से कम दो या तीन दिन का बैक अप देने में सक्षम है। कैमरा 8 मेगापिक्सल का है, साथ में एलईडी फ्लैश की सुविधा भी। फोन में थ्री जी सुविधा उपलब्ध है इसलिए इसे थ्री जी नेटवर्क पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। पांच इंच की स्क्रीन और एन्डरायड 4.04 मिलकर इसे टेबलेट का विकल्प भी बना देते हैं। 1 गीगाहर्ज्ट का डुएल कोर प्रोसेसर निश्चित रूप से इसे उन स्मार्टफोन की लाइन में लाकर खड़ा कर देता है जो अपनी स्पीड के लिए जाने जाते हैं। मेमोरी कम है। सिर्फ 4 जीबी। उसमें भी यूजर के लिए सिर्फ 2 जीबी एविलेबल है। लेकिन यूजर 32 जीबी तक का एसडी कार्ड इस्तेमाल कर सकता है। माइक्रोमैक्स ने इसे फोन और टेबलेट के मिश्रण के तौर पर मार्केट भी किया है और फैबलेट श्रेणी में ही पेश किया है।
कंपनी कोई भी दावा करे लेकिन इसके अलावा दोहरे सिम की सुविधा बताती है कंपनी यह फोन अपने अधिकांश मोबाइल डिवाइस की तरह चीन से आयात करके भारतीय बाजार में बेंच रही है। हालांकि कंपनी के सीईओ का दावा है कि अब वे हरिद्वार में अपनी फैक्ट्री लगा चुके हैं और ज्यादातर आर एण्ड डी इंडिया में ही करते हैं। लेकिन हकीकत तो यही है कि भारत में सभी सस्ते हैंडसेट चीन से आते हैं और यहां उन पर भारतीय कंपनियों की मोहर लगती है। तो इसमे कोई आश्चर्य नहीं। एप्पल का आईफोन भी चीन में ही निर्मित होता है, तो माइक्रोमैक्स का सस्ता स्मार्टफोन भी चीन में निर्मित हो तो इसमें हर्ज क्या है? कम से कम वह एप्पल जितना मंहगा तो नहीं है।
इसलिए जो इंडियन यूजर आईफोन या फिर गैलेक्सी सीरीज के स्मार्टफोन इसलिए नहीं ले पातें हो क्योंकि वे बहुत मंहगे होते हैं, उनके लिए माइक्रोमैक्स कैनवास 2 बेहतर विकल्प है। घोषित कीमत 9,999 रूपये है लेकिन अगर आप मोल तोल और जुगाड़ लगा पाते हैं तो यह आपको इससे कम कीमत में भी मिल सकता है।
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