मनीष दुबे at news war media -
वो जजबो की तिजारत थी , ये दिल कुछ और समझा था
उसे हंसने की आदत थी , ये दिल कुछ और समझा था
मुझे उसने कहा आओ नई दुनिया बसाते हैं !
उसको सूझी सरारत थी , ये दिल कुछ और समझा था
हमेशा उसकी आँखों में धनक रंग होते थे , ये उसकी आम आदत थी
पर ये दिल कुछ और समझा था
मेरे कंधे पर सर रखकर सो गई वो , एक वक्त की इनायत थी !
लेकिन ये दिल कुछ और समझा था !
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