Tuesday, 23 July 2013

लेकिन ये दिल कुछ और समझा था

मनीष दुबे at news war media - वो जजबो की तिजारत थी , ये दिल कुछ और समझा था उसे हंसने की आदत थी , ये दिल कुछ और समझा था मुझे उसने कहा आओ नई दुनिया बसाते हैं ! उसको सूझी सरारत थी , ये दिल कुछ और समझा था हमेशा उसकी आँखों में धनक रंग होते थे , ये उसकी आम आदत थी पर ये दिल कुछ और समझा था मेरे कंधे पर सर रखकर सो गई वो , एक वक्त की इनायत थी ! लेकिन ये दिल कुछ और समझा था !

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