NEWS WAR |नई दिल्ली-
कंपनी कानून और सेबी एक्ट के उल्लंघन के आरोप में मुंबई की एक स्थानीय अदालत ने सहारा समूह के मुखिया सुब्रत राय और समूह की दो कंपनियों को समन जारी किया है। उन्हें 30 सितंबर को अदालत में हाजिर होने को कहा गया है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड की याचिका पर मजिस्ट्रेट ने मंगलवार को यह ताजा समन भेजा है।
इससे पहले सात जुलाई को भी मुंबई की अदालत ने पूंजी बाजार नियामक सेबी की याचिका पर समन भेजा था। मगर समूह की दो कंपनियों और इसके मुखिया द्वारा इसे स्वीकार करने की कोई जानकारी नहीं मिलने पर दोबारा से समन जारी किया गया है। निवेशकों से अवैध तरीके से धन जुटाने के मामले में सेबी ने सहारा पर कंपनी कानून के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
सहारा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चल रहे एक अन्य मामले में सेबी ने दलील दी है कि निवेशकों का धन न लौटाने के मामले में सुब्रत राय भी अदालत की अवमानना के उतने ही जिम्मेदार हैं, जितनी कि आदेश का पालन न करने वाली उनके समूह की दो कंपनियां। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अदालत की अवमानना के मामले में सहारा इंडिया रीयल स्टेट कॉरपोरेशन (एसआइआरईसी) व सहारा इंडिया हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन (एसएचआइसी) और इसके निदेशकों को नोटिस भेजा था। सेबी की ओर से मंगलवार को ये दलीलें सहारा के खिलाफ दाखिल अवमानना याचिकाओं पर बहस के दौरान दी गई। कोर्ट ने इस दौरान सहारा की ओर से अखबारों में जारी विज्ञापनों को अदालत की अवमानना नहीं माना।
सहारा की ओर से अभी सफाई पेश की जानी है। छह अगस्त को इस मामले पर आगे सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 31 अगस्त को सहारा को निवेशकों के 24,000 करोड़ रुपये लौटाने का आदेश दिया था। इस आदेश को लागू करने की जिम्मेदारी सेबी को सौंपी गई है। सहारा द्वारा धन वापस न करने पर सेबी ने सुप्रीम कोर्ट में दो अवमानना याचिकाएं दाखिल कर समूह पर आदेश का पालन न करने का आरोप लगाया है।
इस मामले में सुब्रत राय ने दलील दी है कि उन्हें व्यक्तिगत तौर पर अवमानना का जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। वह न तो उपरोक्त कंपनियों के निदेशक हैं और न ही उन कंपनियों के कार्यकारी पदों पर हैं। वह सिर्फ इनमें शेयरधारक हैं। मंगलवार को सेबी के वकील अरविन्द दत्तार ने इन दलीलों को काटते हुए कहा कि सुब्रत राय भी इन कंपनियों के अन्य निदेशकों की तरह ही अदालत के आदेश की अवहेलना के जिम्मेदार हैं। वे इन कंपनियों के प्रमोटर हैं। इनमें उनकी 70 फीसद हिस्सेदारी है। दत्तार ने कहा कि कानून में कंपनी प्रमोटर को कंपनी निदेशक के बराबर माना जाता है। उन्होंने कंपनियों के निदेशकों और सुब्रत राय को अवमानना कानून के तहत अधिकतम सजा और जुर्माने की मांग की। हालांकि, सुनवाई के दौरान पीठ ने दत्तार से कहा कि वे कोर्ट को बताएं कि इन दो के अलावा सहारा की अन्य कंपनियों से किस कानून के तहत वसूली की जा सकती है।
इसके अलावा जब दत्तार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सहारा की ओर से अखबारों में जारी विज्ञापन का हवाला दिया तो कोर्ट ने विज्ञापन देखकर कहा कि इसमें कोर्ट के खिलाफ कुछ नहीं कहा गया है। ये अदालत की अवमानना नहीं है, हां सेबी के खिलाफ जरूर है।
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