Monday, 22 July 2013

महेश भट्ट: 'आतंकी' कवर?

MAHESH BHATT as news war media जोखर (बोस्टन धमाकों के आरोपी) को कवर पर छापने का एडिटोरियल फैसला आतंकवाद का प्रचार है या 'खराब' पत्रकारिता? (वह कवर देखने के लिए यहां क्लिक करें) 22 जुलाई 2013 डॉक्युमेंट्री फिल्मों को उन लोगों के बारे में बात करनी चाहिए जिनके बारे में ट्रडिशनल मीडिया बात करने से बचता है। 03 जुलाई, 2013 आपका काम अपने काम को पहचानना है और इसके बाद पूरे दिल से उसको खत्म करने में लग जाना है: गौतम बुद्
26 जून, 2013 चीजें हमें खुशी नहीं देतीं। हमारी खुशी इस बात पर डिपेंड करती है कि हम खुद क्या सोचते हैं, क्या महसूस करते हैं। जिंदगी से आपको क्या मिलेगा यह आपका एटिट्यूड तय करता है। 07 जून 2013 प्रेस की स्वतंत्रता के विचार के साथ दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि यह जरूरी नहीं है कि प्रेस कई मौकों पर फेयर ही हो। ऐसी ही जिंदगी भी है। 25 मई, 2013 'खंजर चले किसी पर, तड़पते हैं हम 'अमीर'-- सारे जहां का दर्द हमारे जिगर में है' 22 मई 2013 एक अजीब शोर बरपा है कहीं, कोई खामोश हो गया है कहीं, तू मुझे ढूंढ़ मैं तुझे ढूढ़ूं, कोई हममें से खो गया है कहीं। 20 मई, 2013 लोग मस्जिदों में जन्नत तलाशा करते हैं, फुर्सत इतनी नहीं होती कदम मां के चूम लें। 12 मई, 2013 लोगों को फ्रीडम ऑफ स्पीच(बोलने की आजादी), तब दी गई जब पूंजीवादियों ने मास मीडिया पर पूरा कंट्रोल कर लिया। 6अगस्त,2012 कॉस्मेटिक सर्जरीः लाखों महिलाएं हर साल अपने शरीर को बिगाड़ती हैं ताकि मीडिया द्वारा गढ़ी गई परफेक्ट इमेज हासिल कर सकें। 28 जुलाई 2012 राजेश खन्ना अपनी तस्वीरों, डायलॉग्स और गानों से हमारी जिंदगी की कहानियों का हिस्सा हैं। 19जुलाई,2012 धर्म इसलिए बनाया गया ताकि इंसान के अमरत्व की जरूरत का ध्यान रखा जा सके। 14जुलाई,2012 सुनाः खुद को उस तरह देखना जैसे दूसरे लोग देखते हैं, लाइफ के सबसे मुश्किल कामों में से एक है। 7 जुलाई 2012 तूफान के बीतने का इंतजार करना जिंदगी नहीं है,बारिश में डांस सीखना ही असली जिंदगी है। 26 जून 2012 सब कुछ समझने के लिए सबको माफ करना पड़ता है- बुद्ध 23 जून 2012 सुनाः युद्ध की ट्रैजिडी यह है कि इसमें एक शख्स दूसरे शख्स को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने के लिए अपना बेस्ट करता है। 23 जून 2012 भारतीय मीडिया(मेरी फिल्मों का भी) का स्तर गिर रहा है। मीडिया गंभीरता से इतर हल्की सोच रखने वाले लोगों की मांग के आगे सरेंडर कर रहा है। 21 जून 2012 पढ़ा: किसी पूर्वाग्रह को तोड़ना ऐटम तोड़ने से ज्यादा मुश्किल काम है। 18 जून 2012 जिंदा रहना यानी हम क्या करने वाले हैं इसका फैसला करने की लगातार चलने वाली प्रक्रिया। 14 जून 2012 गए दिनों की खुशबू पाकर...मैं दोबारा जी उठा था- नसीर काजमी 13 जून 2012 ह्यूमन लैंग्वेज से 'बेटर' शब्द को हटा देना चाहिए। जो लोग समझते हैं कि वे बेटर हैं, खुद को दूसरों से सुपीरियर समझते हैं और ग्रेट फील करते हैं। 10 जून 2012 जिंदगी में सुरक्षित रहने की कोशिश में हम ज्यादा से ज्यादा सतर्क होते जाते हैं और आखिरकार हमारी कोई जिंदगी ही नहीं रह जाती। सतर्क न रहें, आप अपने आपको नुकसान पहुंचा सकते हैं। 7 जून 2012 जिस सच में आप विश्वास करते हैं और जिसके साथ आप चिपके हुए होते हैं, वह आपको नई चीजों को सुनने से रोकता है। 6 जून 2012 जब्त लाजिम है मगर दुख है कयामत का फराज, जालिम अबके भी न रोएगा तो मर जाएगा। 5 जून 2012 क्या है जो बदल गई है दुनिया... मैं भी तो बहुत बदल गया हूं- जॉन इलिया 4 जून 2012 'प्रकृति में जितनी गहराई से पैठोगे, आप हर चीज को उतने ही बेहतर तरीके से समझ सकोगे'- अल्बर्ट आइंस्टाइन 30 मई 2012 खुद से यह सवाल पूछिए, 'खुशियां पाने के लिए क्या मुझे सबका इस्तेमाल करना चाहिए? या दूसरों को खुशियां मिले, इसके लिए मुझे उनकी मदद करनी चाहिए?'- दलाई लामा ...लेकिन, दूसरों को खुशियां पाने में उनकी मदद नहीं करना ठीक वैसा ही है, जैसा अपना स्वार्थ पूरा करने के लिए किसी का इस्तेमाल करना। 29 मई 2012 इमाम अलीः जहां इज्जत , सचाई और ख़लूस नज़र आए वहां दोस्ती का हाथ बढ़ाओ , वरना तुम्हारी तन्हाई तुम्हारी बेहतरीन साथी है। 26 मई 2012 दिमाग और समुद्र में एक बात समान है- दोनों निरंतर व्याकुल रहते हैं। 17 मई 2012

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