Friday, 2 August 2013

रेव पार्टी का काला सच


NEWS WAR MEDIA PVT LTD
मुंबई। तेज रोशनी और धमाकेदार संगीत, बिना लय ताल के थिरकते नौजवान, लहराते और एक दूसरे से टकराते जिस्म, हर तरफ धुआं ही धुआं, फिजा में तैरती तीखी और नशीली गंध. कुछ ऐसा ही होता है रेव पार्टी का नजारा। हाई प्रोफाइल रेव पार्टियों को ऑर्गनाइज करने से अंजाम देने तक पूरी प्रक्रिया की भाषा में कोड व‌र्ड्स का इस्तेमाल किया जाता है। पार्टी स्थल, तारीख और नशे में इस्तेमाल होने वाली चीज, हर एक का नाम तय कर दिया जाता है। अगर इस प्रक्रिया में कुछ भी गड़बड़ होती है, तो पूरी पार्टी का भंडाफोड़ हो जाता है। पिछले महीने मुंबई में जुहू के ऑकवुड प्रीमियम अपार्टमेंट में ऐसी ही एक रेव पार्टी आयोजित की गई थी। जिसमें पुलिस ने रेड मारकर आइपीएल के खिलाड़ी राहुल शर्मा, वेन परनेल के अलावा छोटे पर्दे के कलाकार अपूर्व अग्निहोत्री और उनकी पत्‍‌नी शिल्पा पकड़ी गई थीं। हालांकि इस पार्टी के लिए पूरी प्राइवेसी का इस्तेमाल किया गया था। फेसबुक पर 'डिजाइनर हिप्पीज' नाम के पेज पर 15 मई को पार्टी की पहली इन्फर्मेशन डाली गई थी। -रेव पार्टियों की विशेष लैंग्वेज -पार्टी का हिस्सा बनने वाले लोगों का एक खास स्लोगन होता है, मसलन ऑकवुड में हुई पार्टी का स्लोगन था 'प्रमोट म्यूजिक नॉट ड्रग्स'। -पार्टी में एंट्री के लिए ड्रेस कोड होता है और कोड्स को बताने पर एक सिंबल दिया जाता है, जैसे- रिस्टबेंड, बड़े ग्लासेस, कलर्ड गॉगल्स इत्यादि। -रेव पार्टी के स्पेशल कोड- क्लब ड्रग , क्रश ऑन यू (केटामाइन), कोक (कोकीन), ब्लैक टोन (अंधेरे में नशे के साथ लड़की), टाइम पास (गाजा या सस्ता नशीला पदार्थ), फन गेम (पार्टी स्थल), कैल्क्युलेटर (पार्टी का वक्त)। -कैसे मिलता है तस्करों को बढ़ावा दुनिया भर में नशीले पदाथरें के व्यापार को बढ़ावा देने वाले नशे के सौदागर इस धंधे को आगे बढ़ाने में गरीब और अनाथ बच्चों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके लिए वे बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से बच्चों की तस्करी कर रहे हैं। यह बहुत खतरनाक ट्रेंड है जो लगातार बढ़ता जा रहा है। मादक पदाथरें की तस्करी करने वाले बच्चों को बाल न्याय अधिनियम के तहत बहुत कम सजा दी जाती है, जिसका तस्कर फायदा उठाते हैं। -यूनाइटेड नेशन ऑन ड्रग ऐंड क्राइम (यूएनओडीसी) के मुताबिक, पूरी दुनिया में नशीले पदार्थो का सेवन करने वाले लोगों की संख्या तकरीबन 21 करोड़ तक पहुंच गई, यानी दुनिया की कुल जनसंख्या का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा ड्रग्स का आदी है। -21 करोड़ में से हर साल लगभग 2 लाख लोग की मौत नशे की वजह से होती है। -यूएनओडीसी के आकड़ों के मुताबिक, साल 2010 में विश्व भर में 195700 हेक्टेयर में अफीम की खेती हुई। अफगानिस्तान में विश्व भर के कुल अफीम का करीब 74 प्रतिशत हिस्सा यानी 3600 टन अफीम पैदा होती है। -मादक पदाथरें की तस्करी दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा व्यवसाय है। -नशीली दुनिया की एबीसीडी : मुंबई महानगरों से लेकर छोटे गावों तक नशे का हर एक इंतजाम मौजूद है। दस हजार में बिकने वाली कोकीन की पुड़िया से लेकर दस रुपये में बिकने वाली इंक की बॉटल, सभी का इस्तेमाल नशे में होता है। -कोकीन : इसे कोक, चार्ली या ब्लो भी कहा जाता है। इसके सेवन से नर्वस सिस्टम स्ट्यूमलेट होता है, जिससे एनर्जी बढ़ जाती है। इससे शरीर का तापमान और ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। यह अफ्रीकी देशों, मलयेशिया और थाइलैंड से स्मगल होती है। -क्रैक : यह यूरोपियन देशों और अमेरिका से आती है लेकिन इंडिया में इसकी स्मगलिंग अफ्रीकी देशों, मलयेशिया और थाइलैंड से होती है। यह कोकीन का हलका रूप है। -चरस : यह उत्तर भारत, पाकिस्तान और हिमालय की तराई में उगाई जाती है। यह मुंबई में सड़क के रास्ते आती है। -हेरोइन : यह ड्रग अफगानिस्तान, पाकिस्तान और म्यामार से आती है। -गाजा : नशे के लिए इसे तंबाकू में मिलाया जाता है। -ऐक्सटेसी : यह ड्रग लेने से यूजर्स को काफी एनर्जी मिलती है, लेकिन इसके गलत असर भी संभव हैं। जैसे- जी मिचलाना, उल्टी आना, व्यग्रता, डिप्रेशन, दिल का तेजी से धड़कना और ब्लड प्रेशर हाई होना। यदि इस ड्रग को ज्यादा दिन लिया जाए, तो दिमाग के सेल खराब हो सकते हैं। महिलाओं में इसके दुष्परिणाम जल्द आते हैं। -केटामाइन : इस ड्रग को या तो सूंघा जाता है, या स्मोक किया जाता है। इससे दिमाग काम करना बंद कर देता है। इस क्लब ड्रग से व्यक्ति कोमा में भी जा सकता है।

No comments:

Post a Comment