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मनरेगा 'रेंग' रही है तो इंदिरा आवास और लोहिया आवास योजना में अपात्रों का चयन हो रहा है। वृद्धा, विधवा, विकलांग पेंशन और रानी लक्ष्मीबाई आर्थिक मदद योजना भी भ्रष्टाचार के दलदल में फंसी है। जो स्वर्ग सिधार गये उनके खाते में भी पेंशन पहुंच गई। इसी गड़बड़ी को खत्म करने के लिए सभी विभागों में सतर्कता अधिकारी तैनात होने थे, लेकिन नहीं हो सके। मनरेगा में घोटाला रोकने को जिला स्तर पर लोकपाल की तैनाती भी नहीं हो सकी। जबकि आदेश दो साल पहले हुआ था।
गरीबों के लिए चलाई जा रही योजनाओं को सफलता नहीं मिल पा रही है, क्योंकि इन योजनाओं में भ्रष्टाचार का घुन जो लग गया है। इसी भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए ही दो वर्ष पूर्व तय किया गया था कि सभी विभागों में सतर्कता अधिकारी तैनात किए जाएंगे। दो माह पूर्व मुख्य सचिव ने भी अधिकारियों को सतर्कता अधिकारी तैनात करने के लिए कहा, लेकिन नहीं हुए।
मनरेगा योजना में तीन वर्षो में 15 करोड़ रुपये का घोटाला हो चुका है लेकिन आरोपी बच गए। इसके अलावा मनरेगा में ही भ्रष्टाचार रोकने को हर गांव में सोशल ऑडिट के लिए कोआर्डिनेटर तैनात होने हैं, लेकिन सिर्फ सौ गांवों में ही तैनाती हुई। शेष साढ़े चार सौ गांव खाली हैं। इसी तरह लोहिया आवास योजना में दो सौ अपात्रों का चयन किया गया। मामला सामने आया, लेकिन किसी भी दोषी बीडीओ और वीडीओ को दंडित नहीं किया गया। इंदिरा आवास योजना में अब तक 10 करोड़ से अधिक का घोटाला हो चुका है। अभी अपात्रों का चयन हो रहा है। शायद अफसर अनियमितता रोकना नहीं चाहते इसीलिए सतर्कता अधिकारी तैनात नहीं कर रहे हैं। रेशम आवास योजना में भी लोगों से धन लेकर आवास दिए गए। मामला उजागर भी हो चुका है, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे ही विकलांग, वृद्धा और विधवा पेंशन, आर्थिक मदद योजना में दो हजार से अधिक मृतकों के खाते में धन भेजा गया तो एक हजार से अधिक अपात्र भी लाभ लेने में कामयाब हुए। जिन्होंने पेंशन दी उन पर कार्रवाई नहीं हो सकी।
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