Wednesday, 7 August 2013

तो यूपी बोर्ड को अब समझ में आई असली समस्या


माध्यमिक शिक्षा : NEWS WAR -सभी शिक्षकों का 'रिपोर्ट कार्ड' तैयार किया जाएगा -स्कूलों में पढ़ाई का स्तर सुधारने की जमीनी कवायद ---------- ताराचंद्र गुप्ता, इलाहाबाद : नतीजों की होड़ में सीबीएसई और सीआइएससीई से पिट रहे यूपी बोर्ड को अब पढ़ाई की अहमियत समझ में आने लगी है। कई फ्लॉप टोने-टोटके कर चुके बोर्ड ने अब शिक्षकों की नकेल कसने की योजना बनाई है ताकि स्कूलों में पढ़ाई का स्तर सुधरे। नई कवायद के तहत बोर्ड ने माध्यमिक शिक्षकों का 'रिपोर्ट कार्ड' बनवाने का निश्चय किया है जिसके आधार पर शिक्षकों को प्रोत्साहित व आगाह किया जाएगा। बोर्ड प्रशासन का दावा है कि इस कवायद से जहां लापरवाह शिक्षकों पर शिकंजा कसा जा सकेगा, वहीं बेहतर अध्यापन करने वाले मास्साब को शाबासी दी जाएगी। यानी इस रिपोर्ट कार्ड से शिक्षकों को फायदा और नुकसान दोनों होगा। यूपी बोर्ड द्वारा इस व्यवस्था को जल्द ही अमल में लाया जाएगा। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक शिक्षकों के साथ-साथ स्कूलों की भी मॉनीटरिंग की जाएगी। यह काम निरीक्षण में लगे अधिकारियों के जिम्मे होगा। जिन स्कूलों की स्थिति अच्छी नहीं हैं, वहां उनकी कमियों को दूर किया जाएगा। शिक्षकों का रिपोर्ट कार्ड एक माह, तीन माह और छह माह पर बनाया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी प्रधानाचार्य, जिला विद्यालय निरीक्षकों की होगी। खास बात यह है कि रिपोर्ट कार्ड बनाने से पहले शिक्षा अधिकारी संबंधित स्कूल के शिक्षकों से सीधी बात करके उनके बारे में जानकारी करेंगे ताकि प्रत्येक शिक्षक और प्रधानाचार्य का सही 'रिपोर्ट कार्ड' तैयार किया जा सके। इस आधार पर बनेगा रिपोर्ट कार्ड शिक्षकों की उपस्थिति, पढ़ाने का तौर-तरीका, नियमित कक्षाएं लेना, योजनाओं के क्रियान्वयन में भूमिका, परीक्षा परिणाम, शिक्षकों के साथ समन्वय, स्कूल आने-जाने का समय, दी गई जिम्मेदारियों का निर्वहन, समय पर पाठ्यक्रम को पूरा कराना, स्कूलों की समस्याओं का स्थानीय स्तर पर निराकरण करने सहित अन्य कई बिन्दु शामिल किए जाएंगे। वर्सन- ''शिक्षकों के स्कूल आने-जाने और उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने पर विचार किया गया है। जल्द ही इस पर निर्णय लेकर लागू किया जाएगा। इससे शिक्षण व्यवस्था और बेहतर हो सकेगी।'' उपेन्द्र कुमार, सचिव, माध्यमिक शिक्षा परिषद

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