manish dubey | news war media

नोएडा में रेत माफिया से मोर्चा लेने वाली आइएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन से राज्य सरकार की किरकिरी हुई है। इससे पहले भी काले कारनामों का पर्दाफाश करने वाले कई व्हिसिल ब्लोअर अधिकारियों को ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की कीमत बार-बार निलंबन या स्थानांतरण के रूप में चुकानी पड़ी है। बावजूद इसके इन अधिकारियों के जज्बे और हौसले में कमी नहीं आई:
अशोक खेमका [हरियाणा]
पिछले साल अक्टूबर में सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा और डीएलएफ के बीच जमीन की अवैध डील को रद कर सुर्खियों में आए इस आइएएस अधिकारी का बाद में ट्रांसफर कर दिया गया। हरियाणा बीज निगम में पांच महीने के भीतर ही अनियमितताओं को उजागर किया। वहां से भी स्थानांतरण कर दिया गया।
विकास कुमार [राजस्थान]
सॉफ्टवेयर इंजीनियर से आईपीएस अधिकारी बने विकास कुमार ने पिछले साल की शुरुआत में भरतपुर के अवैध खनन माफिया का भंडाफोड़ किया। पुलिस जांच पूरी होने वाली ही थी तभी ट्रांसफर कर दिया गया।
संजीव चतुर्वेदी [हरियाणा]
2002 बैच के हरियाणा कैडर के भारतीय वन सेवा के अधिकारी हैं। हरियाणा में सात साल की सर्विस के दौरान कई घोटालों को उजागर किया। इसके बदले उनके खिलाफ ही पांच आपराधिक मामले दर्ज कराए गए। उन्होंने सितंबर, 2012 में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर उजागर किए गए घोटालों की सीबीआइ जांच कराने का आग्रह किया है।
मुग्धा सिन्हा [राजस्थान]
सितंबर, 2010 में झुंझनु की पहली महिला कलक्टर को स्थानीय माफिया से टक्कर लेने के कारण स्थानांतरित कर दिया गया। इसके खिलाफ स्थानीय लोग उनके समर्थन में आए।
दयमंती सेन [पश्चिम बंगाल]
कोलकाता पुलिस क्राइम ब्रांच की पहली महिला चीफ। इस आइपीएस अधिकारी ने फरवरी, 2012 में पार्क स्ट्रीट गैंगरेप केस की जांच की। उसमें उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दावे को गलत साबित किया। दो महीने बाद ट्रांसफर कर दिया गया।
समित शर्मा [राजस्थान]
चित्तौड़गढ़ के इस डीएम को 2010 में महज इसलिए हटा दिया था क्योंकि उन्होंने एक स्थानीय कांग्रेस विधायक की बात मानने से इन्कार कर दिया। विधायक के कहने के बावजूद उन्होंने एक क्लर्क को नहीं हटाया था। लिहाजा डीएम साहब को ही हटा दिया गया।
उमाशंकर [तमिलनाडु]
1990 बैच के इस वरिष्ठ अधिकारी ने ज्वाइंट विजलेंस कमिश्नर रहते हुए मारन बंधुओं के खिलाफ कार्रवाई की। इसके चलते निलंबित किया गया।
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