Thursday, 29 November 2018

पढ़े, कंटेंट का बाप...जेल जर्नलिज्म मे


मारो मारो, पकड़ो पकड़ो की आवाज से भोर का वातावरण गूँज उठा था। रात तो सभी आराम से सोए थे, फिर ये क्या हुआ अचानक। हलचल सी मच चुकी थी माहौल मे। शोर सुनकर सभी की नींदे उचट गई थीं। क्या हुआ, सभी ने एक दूसरे की तरफ देखकर पूछा। कुछ शोर मचाकर, किसी के पीछे भागे। आखिर हुआ क्या अपराध की इस नगरी मे, क्या भसड़ है सुबह..सुबह। सिर के बाल खुजाते हुए उठा अमर। कुछ देर बाद पता चला दम तमाखू की तस्करी करने वाले दो पक्षों मे तीखी नोंकझोंक हो गई थी। यहाँ किसी भी पल कुछ भी हो सकता है, किसी भी समय आप एक नये रोमाँच से रूबरू हो सकते हैं। इतनी सुरछा व्यवस्था के बावजूद जेल से लेकर कोर्ट खारजे तक जरा जरा सी बात मे चाकुबाजी..ब्लेडबाजी तक हो जाती थी। जरा सा झगड़ा कितना बड़ा रूप ले ले, कोई नहीं जानता। दुश्मनी और दोस्ती होने मे मिनट भर की देरी नहीं लगती यहाँ। टी.वी. और कार्यक्रम के नाम पर क्राईम पेट्रोल, समाचारों मे क्राईम बेस्ड प्रोग्रामो को ही वरीयती दी जाती है। जो माहौल को सनसनी खेज बनाते हुए टी.आर.पी. बटोरते रहते हैं। और तो और मुझे लगता है, क्राईम पेट्रोल को भी सबसे अधिक टी.आर.पी. जेल से ही मिलती होगी।

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