Tuesday, 25 December 2018

जेल जर्नलिज्म- कुछ ऐसा जो अब से पहले कभी देखा पढ़ा नहीं होगा। गारण्टी


रहीम (निकिता) आज सुबह से ही गालियाँ बरसा रहा था, किसी ने उसे भूत कह दिया था। “साला हमका भूत कह दिया”” अपनी पर उतर आया था वो। “ओए बहन का लौरा...मादर..चोद, ओए बहिन... चोद..साहेब..अभी साला पेश कराता हूँ””। दिमाग की सबसे हार्ड व कई गोलियाँ लगवा रखीं थी उसने, जेल ओपीडी से। खतरनाक टाईप नींद की गोलियाँ खाकर भी रात बिरात चिल्ला उठता था वो। कहता है...साला नींद ही नहीं आता है हमका....रात भर मे अपना सब कपड़ा धो डाला हूँ। जिस मर्जी से पिल पड़ता, वन मैन आर्मी ही समझता था खुद को...और बाद मे ठस्सा भी खा जाता। उसकी हालत देखकर कोई भी उससे लड़ने भिड़ने की भूल नहीं करता था, जिसका वो फुल फायदा उठाता था। अपनी पूरी चक्की मे सेक्सी फोटुओं की कटिगें चिपका रखीं थी उसने, फिर भी वो उसके लिये कोई मायने नहीं रखतीं थीं। क्योंकि वो खुद को इनसे कहीं जादा हॉट समझता था। अकेला ही रखा गया था उसे सेल(चक्की) मे। एक दिन अमर चार लोगों के साथ उसकी चक्की मे बीड़ी पीने गया। “अबे रहीम ये फोटुयें तो बड़ी सेक्सी लगा रखीं हैं तूने””अमर ने उसकी चक्की मे लगी उन तस्वीरों को देखकर कहा। वो तुरंत अमर की तरफ देखकर बोला””अरे बाबा..ये क्या है, इधर देखो (अपनी तरफ इशारा करते हुए) ये चढ़ता जवानी। स्तब्ध रह गया था अमर उसकी ...चढ़ता जवानी... देखकर। ब्लैक बनियान, खुली बटनो की व्हाईट शर्ट, सफेद पैण्ट, पीली बनियान तथा सिर पे लाल कैप लगाकर जब वो निकलता तो कयामत तो नही पर कयामत(बुरी सूरत व सीरत वाला) से कम भी ना लगता। बिहार के बाहुबली सांसद शहाबुद्दीन का बड़ा भक्त था वो। कहीं भी उसका जिक्र होता तो खुश होकर वहीं पहुँच लेता, और मजाल थी कि कोई शहाबुद्दीन को कुछ कह जाए। तुरन्त बिना आग धुआँ उठता उससे ...ओए साला उसे कुछ ना कहना...ऊ साला हमारा जिंदगी बचाया है, हमारा भगवान है ऊ...। फिर भले ही कभी मिला हो ना मिला हो अपनी पूरी जिंदगी किसे पता था। उस पर सबसे खतरनाक तरीका उसका किसी को जलील करने का था, एक अलग ही स्टाइल था उसका। फुल लॉउड आवाज मे ...आह..आह..आह, पुच्च..पुच्च..आह किसी कुत्ते की तरह ट्रीट करता सामने वाले को। जेल जर्नलिज्म से साभार............

No comments:

Post a Comment