Wednesday, 26 December 2018

जेल जर्नलिज्म- जो अब से पहले कभी नही देखा पढ़ा....गारण्टी


आज दोपहर की गिनती बन्द हो चुकने के बाद...मारो, पकड़ो, बचाओ...मम्मी की आवाजों के साथ भगदड़ मचने से पूरी कसूरी चौकन्नी हो चुकी थी। रविवार का दिन था, आज प्रशासन भी कमतर ही आता है। बेहतर योजना सेट की थी किसी ने...अपनी खुन्नस निकालने के लिये। उपर के ब्लॉक से दो..तीन खुराफातियों ने नीचे उतरकर एक अन्य प्रीजनर को घूंसा, लात, थप्पड़, जूते के साथ हल्का सा ब्लेड मारकर खूब हंगामा किया। उपर से नीचे आये लड़के दो से तीन मिनट मे ही शूटिंग खतम कर चले गये थे। प्रशासन के आने पर दो चार लट्ठ भी चले पर झाँट किसी की नहीं फटी। किसी ने कहा हेड ने पैसे लेकर फिल्म कराई, कोई बोला मुंशी बिका है...तो किसी ने बताया एक एएस ने पाँच हजार लेकर इस पिक्चर को अंजाम तक पहुँचवाया है। ऐसी हवा बनी कि पीटने वाले भी प्रशासन की जय..जयकार कर रहे थे तो पिटने वाले भी हेड साहब की परवस्ती मे मगन थे। भाई वाह मरवाया भी..बचवाया भी, वाह रे प्रशासन। ...............
जेल जर्नलिज्म से साभार........

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