Sunday, 23 December 2018

जेल जर्नलिज्म - पढ़ें कंटेंट का बाप


फिर ना दोहराना, तुम प्यार की भूल को खुशबू मिलती नहीं, हर एक फूल को.... गम के मारों की, किस्मत बदलती नहीं कश्तियाँ खुद कभी, किनारों से मिलती नहीं... हमको जलना यूँ ही है, शमा की तरह तुम मगर अपने, दिल को जलाना नहीं.... याद आऐंगे हम, याद करना नहीं प्यार की भूल को, राह की धूल को, फिर उड़ाना नहीं पढ़ सको ना जिसे वो मै तहरीर हूँ गम की उलझी हुई एक जंजीर हूँ..... दर्द देकर ना तूने दिए हौंसले खूब तूने किए प्यार के फैसले..... गम जो बक्शे हैं, तूने मुझे प्यार मे सिलसिला फिर ये, गम का घटाना नहीं..... बेवफा...., याद आऐंगे हम याद करना नहीं राहें मंजिल की, जाने कहाँ खो गईं जिंदगी गम के, आगोश मे सो गई..... राख के ढ़ेर, मे है नशेमन मेरा दोष पर है, फिजाओं का गुलशन मेरा.... मेरी किस्मत मे लिखा है रोना यूँ ही तुम मगर अपने आँसू बहाना नहीं.... बेवफा...., याद आऐंगे हम, याद करना नहीं प्यार की भूल को, राह की धूल को फिर उड़ाना नहीं...... ..................जेल जर्नलिज्म से साभार।

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