Wednesday, 14 August 2019

बलिया का दल्ला थानेदार


मनीष दुबे: पुलिस नाम की व्यवस्था का ऐसा रैकेट सुनने वालों के कानों में किलोल जरूर करता होगा. और यदि नहीं करता तो आप निष्ठुर निष्क्रिय हैं. आज कोई और है कल निश्चित आप ही होंगे. ऊपर लगी फ़ोटो बलिया के भीमपुरा थाना निवासी vipin sharma की है. दिन 3 जुलाई 2019 की रात विपिन की अपने कुछ इलाकाई लोगों से कहासुनी व हाथापाई हो गई. मुखबिर की सूचना पे भीमपुरा पुलिस विपिन को थाने उठा ले गई. झगड़े की सूचना में विपिन पे धारा 354(ख), 376, तथा 34 ipc लगाई गई. उक्त मामला तत्कालीन थानेदार सत्येंद्र कुमार रॉय के संज्ञान में लिखा गया. मामूली झगड़े के दोषी vipin sharma पर बलात्कार की धारा लगाकर 4 जुलाई को जेल भेज दिया गया. Vipin sharma से जेल में बयान लेने गए दारोगा प्रताप नरायन यादव ने विपिन के घर से किसी को थाने भेजने को कहा. विपिन के कुछ रिश्तेदार विपिन की पत्नी सहित थाने पहुंचे. थाने में सत्येंद्र रॉय ने दरोगा प्रताप के माध्यम से धारा 376 हटाने की एवज में 40 हजार की डिमांड रखी. बाद में सौदा 35 हजार में क्लियर हुआ. 35 हजार रुपये लेकर विपिन शर्मा पर से धारा 376 हटा ली गई. ठीक इसी तरह का मिलता जुलता मामला rti एक्टिविस्ट सिंघासन चौहान के साथ भी हुआ. बकौल सिंघासन चौहान जिस दिन का ये मामला 376 उन पर दर्ज किया गया वो ट्रैन से सफर कर रहे थे. सिंघासन को उक्त फर्जी 376 के मामले में जेल भेज दिया जाता है. जबकि सिंघासन के पास उक्त दिन के ट्रैन टिकट सहित अन्य सभी साक्ष्य मौजूद हैं. सिंघासन चौहान ने सारे सुबूतों के साथ मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री तक गुहार लगाई है. पूरा मामला दैनिक जागरण तथा सांध्य दैनिक 4pm सहित भड़ास4मीडिया में कई पार्टों में लगातार प्रकाशित हो रहा है. सुनवाई चल रही है पर प्रक्रिया वो भी सरकारी, चलेगी तो अपने ही ढर्रे पर. दोषी थानेदार सत्येंद्र कुमार रॉय व अन्य पर कार्रवाई होगी भी या नहीं, पुलिस नाम के ये रैकेटबाज जेल जाएंगे या नहीं, बयानबहादुर पीएम सीएम मामले को संज्ञान में लेकर कोई भी कार्रवाई करेंगे भी या नहीं सब यक्ष प्रश्न की तरह घूम रहा है. मामला पीड़ितों से बातचीत पर आधारित है. जिनके वॉइस टेप हमारे पास मौजूद हैं.

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