सुबह खबरों का मुआयना करते हुए एक खबर देखी, लिखा था ''हैदराबाद कांड के आरोपियों को डिनर में खिलाया मटन''... बस दिमाग सन्न हो गया पढक़र... सोच रहा था, जब दो कौड़ी के अपराधियों को छह सौ रुपये किलो का मटन नसीब हो रहा है तो उल्लू की पठ्ठी जनता; जो मटन में डलने वाला प्याज तक नहीं खरीद सकती, उनके द्वारा चुने गये पवित्र पापियों यानि हरामी माननीयों को क्या-क्या सुविधाएं नसीब होती होंगी? इसका भी आंखों देखा एक उदाहरण बता देता हूं कि उनको क्या सुविधाएं मिलती हैं। गोरखपुर जेल में सजा काट रहे पति-पत्नी को पहले गोरखपुर में इलाज के लिए जेल से अस्पताल शिफ्ट किया जाता है, उसके बाद डॉक्टर उनका केस लखनऊ के अस्पताल में रैफर कर देते हैं। लखनऊ से उन्हें इलाज के लिए दिल्ली ऑल इंडिया मेडिकल इंस्टीट्यूट ले जाया जाता है। वहां वह दोनो पति-पत्नी अपनी खूब खरीदारी करते हैं, बेटी की शादी अटेन्ड करते हैं और दस दिन बाद फिर लखनऊ अस्पताल में शिफ्ट हो जाते हैं... यहां भी खूब शॉपिंग और मौजमस्ती भरा एक महीना गुजार कर वापस गोरखपुर पहुंच जाते हैं। हत्या और बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों में जेल पहुंचने वाले लोगों को जेल में सब कुछ हासिल हो जाता है, बस चढ़ावा चढ़ाना पड़ता है। खैर... ये सच तो सभी जानते हैं, लेकिन बोलता कोई नहीं... ऊपर से नीचे तक सिस्टम ही ऐसा है... सब के सब भ्रष्ट... जो अफसर कुछ अच्छा भी सोचें तो उनका ट्रांसफर तय है... ऊपर से हमारी-आपकी मानसिकता कि हमें क्या फर्क पड़ता है। फर्क तो पड़ता है, अपराधियों के साथ वही सलूक किया जाना चाहिए जिससे पल-पल उन्हें अहसास हो कि उन्होंने गुनाह किया है... कड़ी यातनाएं देकर या तो उन्हें सुधरने पर मजबूर कर दिया जाए, या कू्ररतम सजा देकर समाज में कड़ा संदेश दिया जाए... अन्यथा फर्क तो हैदराबाद ही नहीं पूरे देश में पड़ता है... बात अलग है कि सहना पीडि़त परिवार को पड़ता है। कई देशों में साधारण जेल के बावजूद दुष्ट अपराधियों को सीमित समय के लिए यातना गृह में रखा जाता है... अगर वह नहीं सुधरते तो समय सीमा बढ़ा दी जाती है।
महिलाओं के हित की बात करके पोस्ट पर लाइक कमेंट बटोरना अब फैशन बन गया है। क्या आपको पता है आपका बेटा कितना हरामी है... या हैदराबाद पशु चिकित्सक को रेप कर जिंदा जलाने वाले उन लौंडों के माता-पिता को पता था कि उनके कपूत ऐसा घृणित कार्य कर सकते हैं? नीचे एक तस्वीर है, गौर से देखिए... ये जयपुर के एक लौंडे की है। मैं एक नहीं बल्कि कई पोस्ट में ऐसे हरामी लौंडों से बचने, उन्हें पहचानने की सलाह देता आया हूं। तब मुझे कई कमेंट में ये भी सुनने को मिला कि मेरे पास बेटियां हैं बेटा नहीं, इसलिए मैं बेटों के खिलाफ रहता हूं... और ऐसे कमेंट करने वाले अनपढ़ लोग नहीं थे... सब के सब हाई सोसयटी से संबंध रखते थे। तो बात कर रहा था, कि उक्त पोस्ट में मैं क्या सलाह देता था, लिंक दे दिया है उसे भी पढि़ए। नीचे तस्वीर में दिखने वाला स्मार्ट ब्वॉय यकीनन अपनी मम्मी का राजा बेटा ही होगा। लेकिन रानी मां को नहीं पता होगा कि उनका बेटा हैदराबाद के उन लौंडों की राह के समकक्ष चल रहा है। तस्वीर में साफ देखिए कि अपनी छत से होता हुआ यह लौंडा दूसरे पड़ोसी की छत पर पहुंचा और रस्सी पर सूख रही पड़ोसी महिला की पैंटी चुराकर ले गया... ये इस लौंडे का आए-दिन का काम था। पड़ोसी ने पहले सोचा किसी बंदर या पक्षी का काम हो सकता है। जब अति हो गयी तो उसने छत पर सीसीटीवी कैमरा लगवा दिया। तभी यह तस्वीर आप लोगों के समक्ष है। दिमाग लगाकर मत सोचिए सीधी बात है, यह लौंडा अपने अंदर के कामदेव को जगाने के लिए महिलाओं की ब्रा-पैंटी चुराकर मास्टरबेट ही करता होगा... उसे सूंघकर कल्पनाओं में उक्त महिला के अंगों की छुअन को महसूस करता होगा, ताकि वह ज्यादा उत्तेजित होकर चरम सुख पा सके। अब सोचिए पड़ोसी अगर कैमरा न लगवाता तो क्या सच सामने आ सकता था? रानी मां को पता चल सकता था कि उसका बेटा उतना सीधा नहीं जितना देखने-बोलने से लगता है। बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लेना, सामने पड़ते ही आंटी जी नमस्ते कहने वाले ऐसे लौंडे पकड़ में इसलिए नहीं आते क्योंकि उनके बर्ताव को देखकर आप शक नहीं कर सकते। क्या गारंटी है कि उन्हीं आंटी जी के अतर्वस्त्रों से ऊबकर यह लौंडा छत पर खेल रही किसी की बेटी को अपना शिकार नहीं बनाता। कोई गुंजाइश ही नहीं बची कि आज के माहौल में हम यह बात न सोचें। अच्छा किया जो उक्त परिवार ने इस खबर को मीडिया के माध्यम से जगजाहिर किया। एक पोस्ट में मैंने जिक्र किया था जब पंजाब में मेरी एम्बेसेडर कार दुर्घटनाग्रस्त हो गयी और मुझे 13 दिन पंजाब में गुजारने पड़े.. जिस रिश्तेदार के घर हम लोग रह रहे थे उनका 15 वर्षीय बेटा अल सुबह शॉच करने घुसा लेकिन 30 मिनट तक बाहर नहीं आया। पिता ने झांककर देखा तो नजारा वही था, जिसका जिक्र मैंने ऊपर किया है।
दरअसल, लड़कियों को सांस्कारिक घुट्टी पिलाने की जगह इन लौंडों पर नजर रखना ज्यादा जरूरी है... उसके मोबाइल को चैक करें कि कितनी पोर्न मूवि हैं... जिस कम्प्यूटर सिस्टम को वह यूज करता है, 'यू-टयूब' और 'गूगल' पर उसकी हिस्ट्री चैक करें कि ज्यादातर वह किस साइट को ओपन करता है... अगर वह हिस्ट्री डिलीट कर देता है तो 'गूगल' सही मायनों में आपको बाप बनने का अवसर भी देता है... ''गूगल माई एक्टिविटी'' में जाइए और फिर चेक करिए कि उसने कब किस वेबसाइट को खोला और क्या देखा-पढ़ा। अगर आपका राजा बेटा कामदेव मेंं तब्दील होता दिखे तो तुरंत एक्शन मोड में आकर अपने तरीके से उसे आगाह करें, कंट्रोल करें। अगर आपको पता है कि आपका लडक़ा मास्टरबेट करने लगा है, तो आप उसे छुपायें नहीं... ये सोचकर खुश न हों कि अब वह जवान हो गया... बल्कि उससे एकदम खुलकर इस विषय पर बात करें... उसे सम्भोग से समाधी पढ़ने को दीजिये जिससे वह जान सके कि रति कितनी होती हैं, किसके मिलन से महाआनंद प्राप्त होता है, और समाधि क्या है। क्या संभोग में समाधि की झलक है ? या समाधि में संभोग की पूर्णता है''... साथ ही वह यह भी जान सके कि कब और कैसे लहू-मांस की यह काया उस मंदिर और मस्जिद-सी हो जाती है, जहां पूजा वाली धूप की सुगंध अंतर से उठने लगती हैं और कोई आयत भीतर से सुनाई देने लगती है''... उसे बताइये हर क्रिया का एक समय होता है, क्योंकि असमय करने वाली मास्टरबेट की यह लत उसे एक न एक दिन अपराधी बनने पर मजबूर कर देगी.... और लोग उसे सिर्फ फांसी देने की ही मांग करेंगे ''हैदरबाद'' उदाहरण आपके सामने है... समाज को सुधारने के साथ-साथ अपने घर के कामदेव पर नजर रखिए, उसे सुधार लेंगे तो समाज अपने आप सुधर जाएगा।
रतन प्रकाश सिंह की फ़ेसबुक वॉल से साभार

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