#इमरजेंसी
नेता जी का फोन बजा। एक बार। दो बार। तीन बार बजा। नेता जी ने पीए को फोन पकड़ा दिया।
'हां, हेलो!' पीए बोला।
'सर प्रणाम!'
'प्रणाम! प्रणाम! (फोन करने वाला पहचान गया कि यह नेता जी नहीं वरन उनके पीए जी बोल रहे हैं।)
'सर आपकी पार्टी के प्रवक्ता जी नहीं आये! फोन ट्राई किया मगर स्विच ऑफ जा रहा है!'
'हां, उनको अचानक से कहीं जाना पड़ा।कुछ इमरजेंसी आ गयी! '
'क्या नेता जी आ सकते हैं!'
'क्या कोई इमरजेंसी है!'
नॉट एट ऑल सर!'
'नेता जी को क्यों तकलीफ देते हो !'
'आपकी पार्टी का पक्ष कौन रखेगा सर!'
'तुम हो न!'
यह कहकर पीए ने फोन काट दिया।
वरिष्ठ पत्रकार अनूप मणी त्रिपाठी की एफबी वॉल से साभार
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