Wednesday, 29 April 2020

पान सिंह तोमर की याद में रवीश की कलम से


फिर से सारी सड़कें ख़ाली हो गई हैं। कोई ओझल हुआ है या आंसू ज़्यादा है। जीना भी एक चांस है। किसी का वो चांस आज चला गया। अपनी ग़रीबी, भूख और प्रतिभा को समेट कर पर्दे पर दौड़ते देखा था। पान सिंह तोमर आज भी दौड़ रहा है। दौड़ते दौड़ते ओझल हो गया है। अलविदा इरफ़ान । ये लाँच बाक्स याद दिलाता रहेगा। हमारी ज़िंदगी में कोई शानदार अभिनेता था। ख़ाली है। मगर यादें भरी हुई हैं।

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