Saturday, 8 May 2021
होनोलुलु का राजा और आरएसएस
होनोलूलू देश का एक राजा है। राजा के राज्य में मृत्योत्सव चल रहा है। राजा तमाम अवसरों पर प्रजा की अपने प्रति भक्ति भाव की परीक्षा लेकर उनका आई०क्यू० लेबल चेक करता रहता है। राजा को होनोलूलू के राज्यसिंहासन पर बैठाने वाली एक बहुत ही विशाल संस्था है जिसका नाम है-"रांड-सांड-सर्वनाश"..शार्ट फार्म में अंग्रेजी में आप इसे (R.S.S. Of Honolulu) भी कह सकते हैं। यह होनोलूलू का वह शक्तिशाली संगठन है जो महान जादूगर पीसी सरकार से भी बड़े-बडे़ जादू व ILLUSION कर सकता है। ....इस संगठन के पास जादू का ऐसा बेमिसाल थैला है कि उसमें से वह कोई भी झूंठ निकालता है और उसे किसी अकाट्य सत्य की तरह सामने परोस देता है। आज से करीब 30 साल पहले इस संगठन ने होनोलूलू की जनता का पहला आईक्यू चेक किया था-- रातों-रात होनोलूलू की जनता एक कटोरी दूध और एक चम्मच लिए पत्थरों के पास बैठ गई। मंजीरा और ढोलक निकल आई...संगठन समझ गया कि वक्त लगेगा लेकिन होनोलूलू की जनता को "फुलटास लुल्ल" बनाया जा सकता है। संगठन अपनी योजना में लगा रहा और आखिरकार एक प्यादा खोज कर निकाला गया। प्यादा भी ऐसा कि बाबा मारीच की तरह रूप बदलने में माहिर...। होनोलूलू में प्यादा राजा बना। राजा की पीठ पर एक छेद था जिसमें प्रोग्रामिंग करके एक माइक्रोचिप चेप दी गई थी जिसकी चाभी -"रांड-सांड-सर्वनाश" के पास थी। अब प्यादे को वही करना था जो (R.S.S. Of Honolulu) चाहता था। R.S.S. Of Honolulu यह जान गया था कि मूर्खों के साथ करना क्या है।
शक्यो वारयितुं जलेन हुतभुक्छत्रेण सूर्यातपो नागेन्द्रो निशिताङ्कुशेन समदो दण्डेन गोगर्दभौ।
व्याधिर्भेषजसङ्ग्रहैश्च विविधैर्मन्त्रप्रयोगैर्विषं सर्वस्यौषधमस्ति शास्त्रविहितं मूर्खस्य नास्त्यौषधम्।।
अर्थात्----
जल से आग बुझाई जा सकती है, सूर्य के ताप को छाते से रोका जा सकता है, मतवाले हाथी को तीखे अंकुश से वश में किया जा सकता है, पशुओं को दण्ड से वश में किया जा सकता है, औषधियों से रोग भी शान्त हो सकता है, विष को भी अनेक मन्त्रों के प्रयोगों से शान्त कर सकते हैं - इस तरह सब उपद्रवों की औषधि शास्त्र में है, परन्तु मूर्ख की कोई औषधि नहीं है।।....
इस श्लोक को फालो किया गया। पहले होनोलूलू की जनता की बीन बजाई गई। उल्लक-गुल्लक, पीएफ-ईपीएफ, अचत-बचत ...सब खाली करवा ली गई। नौकरियां तेल हो गईं और तेल के दाम मंगलगृह से तय होने लगे। क्योंकि होनोलूलू की खुश और संपन्न प्रजा विद्रोह कर सकती थी इसलिए पहले दो रोटी कमाने को ही विकास समझें, यह बता दिया गया। फिर होनोलूलू की जनता को तमाम नये-नये अवसरों और उत्सवों से परिचित कराया गया। आजकल होनोलूलू की प्रजा खुश है और मृत्योत्सव का आनंद ले रही है। मजेदार बात यह है कि शिक्षित प्रजा भी मस्त है क्योंकि जैसे कुछ लोगों को यह बता कर हथियार थमा दिए गये कि काफिरों को मारोगे तो 72 हूरें मिलेंगी इसी तरह इधर भी बताया गया कि धर्म खतरे में है इसलिए उसके लिए मरोगे तो मोक्ष मिलेगा। होनोलूलू देश, के नेपाल से सटे एक राज्य में तो एक "जनसेवक" ने "शमशान घाट का उद्घाटन" करते हुए कहा ही था--"यहां जलने में बहुत मजा आएगा। यहां जलोगे तो सीधे स्वर्ग जाओगे...।" होनोलूलू की आवाम अब सीधे मोक्ष को जा रही है।
"वाहन चालक द्रव्य" की कीमत "प्यार भरी उड़ान" पर है और "कढ़ाई तेल" नैसर्गिक सौंदर्य की अनुभूति कर रहा है। उधर प्यादा मस्त है। अपने लिए एक "पुष्पक एक्सप्रेस उड़नखटोला" ले आया है और इधर "इंदरदेव" को चिढ़ाने के लिए महल बन रहा है। ....और प्रजा?....प्रजा धर्म रक्षा कर रही है.....मोक्ष को जा रही है.... होनोलूलू में रात की चिंताएं जब आसमान पर लाल रौशनी फेंकती हैं तो "यम" "राज्य"...भी दहल उठता है......यही तो होनोलूलू राष्ट्र की विशेषता है कि उसने यम तक को हिला दिया है...मोक्ष ढोते-ढोते यमराज भी हांफ रहे हैं लेकिन धर्मरक्षार्थ होनोलूलू की प्रजा कहां मानने वाली.....बोलो!... होनोलूलू की ज्ञानवान धर्मशील प्रजा की जय....।...
पवन सिंह की एफबी वॉल से साभार
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