Wednesday, 23 June 2021
आपने खबर छापने से पहले हमसे पूछा था क्या?
आपने खबर छापने से पहले हमसे पूछा था, क्या?
'हेल्लो मैं एसएचओ थाना बाबूपुरवा बोल रहा हूँ. जी बताइए अचानक आये इस फ़ोन पर पलटकर जवाब दिया गया. कौन बोल रहे हैं, मैंने अपना नाम बताकर कहा फलाने'. 'ये बताइए आपने ये खबर लिखी है, हमसे पूछा था क्या? उधर से सवाल दागा गया. अब ये भी पूछना पड़ेगा क्या आप-लोगों से की क्या छापें क्या नहीं! जनज्वार में छपी खबर के सिलसिले में हमने सभी एविडेंस होने की बिहाफ पर छापा गया और संबंधित भूपेंद्र यादव से भी बात कर ली जाने का हवाला दिया। साथ ही कहा कि आपके हमराही का वर्जन भी हमने ज्यों का त्यों प्रकाशित किया है।'
जिसके बाद सीयूजी नंबर से आया फोन हमसे कहता है कि 'खबर की प्रामाणिकता क्या है, जिस पर जवाब दिया गया कि अभी थोड़ी देर में हम वीडियो भी प्रकाशित करने वाले हैं। जिसके कुछ ही सेकंड में फोन कट गया। गज्जब अंधेर है चल रही है उत्तर प्रदेश में खबर छापने के लिए भी संस्थानो को इजाजत लेनी पड़ेगी या पड़ रही है। मय सबूत के बावजूद पत्रकारों को जवाब देना पड़ रहा है।
पूरा मसला बाबूपुरवा स्थित मुंशीपुरवा में पति-पत्नी का विवाद का था। जिसमें 2018 को हुए दहेज के एक मुकदमें के बाद, दोनो का फरवरी 2019 को समझौता हो गया था। जिसके बाद फिर हुए विवाद से यह घटनाक्रम होना बताया जा रहा है। पीड़ित सारिक खां के मुताबिक लड़की पक्ष की तरफ से चौकी इंचार्ज भूपेंद्र कुमार यादव ने 20 हजार रूपये लेकर उसे प्रताड़ित किया है।' चौकी इंचार्ज पर आरोप है कि युवक के प्राइवेट पार्ट में कोई ज्वलनशील पदार्थ डालकर उसकी बेतहासा पिटाई की गई. मामले में पहले तो एसएचओ ने अर्दब में लेने की कोशिश की, लेकिन जब उसे लगा होगा कि यह उन पत्रकारों में से नहीं लग-दिख रहा जो रोजाना वहां जाकर दस्तक देते होंगे. जिसके बाद फ़ोन कट जाता है.
नीचे पढ़िए मामले से संबंधित दोनों खबरें.....
https://janjwar.com/national/exclusive-in-the-mian-bibi-quarrel-the-outpost-in-charge-took-20-thousand-from-the-opponents-and-beat-the-young-man-with-flammable-powder-in-the-anus-757147
जनज्वार इम्पैक्ट.
https://janjwar.com/national/impact-order-for-investigation-in-the-beating-of-kanpur-muslim-youth-sarik-acp-babupurwa-will-find-equation-757270
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