Monday, 28 March 2022
इस कलेक्टर के ऑफिस का दरवाजा बंद नहीं होता
द बालक : यह नम्रता गांधी हैं छ्त्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित गरियाबंद जिले की कलेक्टर। चूंकि नाम मे नम्रता भी है और गांधी भी है तो असर आना ही था।
आज गरियबन्द में मैनपुर ब्लाक के 65 टोलों के आदिवासियों ने विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन चक्का जाम का ऐलान किया था। जब नम्रता को कुछ दिनों पहले इस कार्यक्रम की सूचना मिली तो उन्होंने अधिकारियों को बुलाया और कहा कि मांगों पर काम तुरंत शुरू करो, नतीजा यह हुआ कि प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बन गया, रपटा पूल भी बन गया।
आज हजारों आदिवासी तय समय पर गरियबन्द पहुंचे जरूर लेकिन अपने कलेक्टर दीदी से मिलकर वापस लौट गए। अब अधिकारी गांवों में हैं और दिन रात एक करके आदिवासियों की मांगों को पूरा कर रहे हैं। उन्हें पता है कि तय सीमा में काम पूरा न हुआ तो बख्शे नही जाएँगे।
कुछ दिनों पहले मैं गरियबन्द गया था तो देखा कलेक्टर के बाहर का दरवाजा बंद नही रहता। बाहर मोटे मोटे अक्षरों में नम्रता गांधी का नम्बर भी लिखा हुआ है। फिर कहता हूँ देश को लड़कियों के हाथ में सौंप दो फिर देखो।
पत्रकार आवेश तिवारी की एफबी वॉल से साभार
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