Friday, 1 April 2022
किसकी किसकी गोलियों का पानी बढ़ा है
विधानसभा चुनाव निपट गए. लोग जीते, मंत्री मिनिस्टर बने. पूरे प्रदेश के लोग नए नेता की खुद के साथ फ़ाइल फ़ोटो खंगाल रहे हैं. कानपुर इन सब मामलों में हटकर है. उसपर आला यहां के निवासी. इस बार शहर को एक भी मंत्री नहीं मिला. लेकिन सतीश महाना को विधानसभा अध्यक्ष पद मिलने के बाद गोलियों का पानी बढ़ा है. अब तक कानपुर में जितने लोगों से सामना हुआ सबका कोई न कोई बहते करीबी आदमी रिश्तेदार मंत्री पद पा गया है.
यही,...यही तो खूबसूरती है इस कानपुर की साहब जो जीता, वहीं चाचा....फूफा...मौसा जुड़ते जाते हैं. अब अपने चौबे जी को ही लीजिए, अजय कपूर के जीतने का हजार प्रतिशत दावा किये थे, लेकिन कल ही अपनी डीपी में महेश त्रिवेदी के बगल में खड़ी फ़ोटो चिपकाए हैं. मिश्रा जी पार्षद प्रतिनिधि हैं, जिनका तो बाकायदा वीडियो वायरल हुआ था, कल्याणपुर में कांग्रेस विधायक को जिताने का. लेकिन कल ही नीलिमा कटियार के पांव छूकर आशीर्वाद वाली फ़ोटो फेसबुक पर डाली है. तो शुक्ला जी ने सतीश महाना के साथ हनुमान मुद्रा वाली फ़ोटो शेयर किए हैं. कल तक शुक्ला जी सतीश चंद्र मिश्रा के बालसखा थे. लेकिन अब दिल से साखाई हो गए हैं. रज्जन तिवारी तो बहुत तेज आदमी निकले। राम जुहार तक का शब्द बदल दिया है. अब से पहले वो नारायण नारायण करते थे लेकिन अब किसी की नमस्ते का उत्तर राम-राम कहकर देने लगे हैं.
ठीक परिणाम बाद साइकिल से उतरकर से मंडल का कमंडल थामने वाले छुटकऊ दुबे ने कल महीने में एक आध दफा निकलने वाले अखबार को साक्षात्कार दे दिया, कहे कि, जो राम को लाये हैं हम उनको वापिस गद्दी सौंपे हैं. छुटकऊ की माने तो उसने होशियारी दिखाते हुए वोट डाला था. अखबार से बतियाते हुए उनने सपा में रहकर भाजपा को वोट डालने की बात स्वीकारी थी. कानपुर में सपा तीन सीटों से अधिक पर चुनाव जीत सकती थी लेकिन छुटकऊ भइया ने वोटिंग से एक रात पहले पूरा का पूरा गेम कैसे पलट दिया, ये पूरी कहानी उनने खबर बटोर अखबार को शब्दशः बताई थी.
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