मीडिया का आइना है भड़ास
नमस्कार भड़ास !
पहले की तरह कुछ शब्द भड़ास के नाम ! सब को पाता है लोकतंत्र में मीडिया का चौथा स्थान रक्खा गया है ! जो विधायिका , न्यायपालिका व कार्यपालिका पर निगरानी के बाद उनके कार्यकलापो को जन - जन तक पहुचने का काम करता है ! अब यहाँ जरुरत पड़ती दिखी मीडिया की इन्टरनल खबरों की ! सब की खबर लेने वालों की भी खबर लेने वाला भी तो कोई होना चाहिए ! वो भी आज की मीडिया ! बरखा दत्त , वीर संघवी और प्रभु चावला जैसी मीडिया ! ऐसे में यशवंत साहब का एक उम्दा व सराहनीय उपक्रम है भड़ास !
आज जो भी उल्टा - सीधा खुलकर लिखता हूँ वो भी अपने बारे, में भड़ास में प्रकाशित होता है ! लोग खुलकर अपने विचार देते हैं ! मेरा पिछला आर्टिकल "जूतों का लाइव और मेरे जूते गुमशुदा " जो मेरे जूतों के चोरी जाने पर केन्द्रित था ! मेरे एक मित्र हैं , मित्र क्या बड़े भाई मेरे गुरु है ब्रजेश शर्मा जी ! न्यूज़ 24 (बैग फिल्म) में कुछ साल उनके साथ काम करने का मौका मिला , काफी कुछ सीखा था उनसे मैंने ! ब्रजेश भाई ने कहा की पत्रकारिता में खुद को इतना नीचे गिरा कर चलोगे तो कैसे कर पाओगे ! दिल्ली में बैठने का मौका मिला है बाकी तुम्हारी मर्जी ! तो ब्रजेश भाई मै कहना चाहूँगा पत्रकारिता अगर आइना है तो इसे हम खुद क्यों नहीं देख सकते ! मैंने जो कुछ लिखा वो हो सकता है आपके द्रस्तीकोड़ से गलत हो ! पर शायद मुझे ये ठीक लगा ! एक शांत व स्थिर वातावरण में अन्दर से आवाज़ निकली की मुझे अपने बारे में लिखना चाहिए ! मैंने लिखा ! दिल की टीस भड़ास के रूप में भड़ास में प्रकाशित हुई ! और मुझे लगता है ये मेरे लिए भड़ास द्वारा मेरी सराहना है !
और ब्रजेश भाई ये भी हो सकता है की जो पत्रकारिता मै करता हूँ उसमे सच्चाई हो ! नव मीडिया के दौर में जब सब पैड है तो कम से कम मै समझता हूँ कुछ तो अनपेड होना चाहिए ! खोखली और दिखावे की पत्रकारिता भाई मुझे नहीं करनी ! पॉवर और ग्लेमर के तडके वाली इस फिल्ड में आज भी कई ऐसे प्रेस वाले है जिन्हें सुबह प्रेस के लिए भी सोचना पड़ता है ! पर वो भी पत्रकारिता करते है , और मजाल है किसी से एक रूपया भी एंठते हो ! बहुत कम लोग होते है जो पानी के बहाव को चीरकर अपने लिए मुकाम बना पाते है ! नहीं तो हालात से समझौता या बहाव के साथ बह जाने वाली स्थिति बहुतायत देखि है मैंने !
नमस्कार भड़ास !
मनीष दुबे
8130073382
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