MANISH DUBEY जयपुर।at news war media -
रामबाग की हवाओं में जादू घुला-मिला था, परियों की कहानियों वाला महल, कभी हमारा खूबसूरत, आरामदायक और खुशहाल घरौंदा था। मैं रामबाग में दुल्हन के रूप में आई थी और यह आधी से ज्यादा जिंदगी मेरा घर रहा था। स्व. राजमाता गायत्री देवी के ये शब्द उनके उस लगाव को बयां करते हैं, जो उन्हें रामबाग से था।
यह भावुकता उस दौर की है, जब शाही महल, लग्जरी होटल में तब्दील हुआ था। असल में कभी रजवाड़ों का घर रहा यह शाही होटल कई बदलावों से गुजरा है। एक शाही बाग के पांच सितारा होटल में तब्दील होने का यह सफर एक दिलचस्प कहानी है।
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