Tuesday, 23 July 2013

लैपटॉप से बदलती सोच और जिंदगी


विचार - फरजंद अहमद, वरिष्ठ पत्रकार - कानपुर देहात के एक गरीब परिवार की 17 वर्ष की छात्रा अर्चना को पिछले दिनों जब प्रदेश सरकार की योजना के तहत लैपटॉप मिला, तो उसके मुंह से निकल पड़ा, ‘अब हमें यह लैपटॉप चांद तक ले जाएगा।’ सचमुच अभी कुछ दिनों पहले तक यह लैपटॉप अर्चना जैसी लड़कियों के लिए चंदा मामा दूर के जैसा था। उधर वाराणसी की 19 वर्षीया रिजवाना शाहीन दुपट्टे के कोने से लैपटॉप-स्क्रीन को पोछते हुए कहती है, ‘यह लैपटॉप नहीं, पूरा ज्ञान का पुस्तकालय है। मैं इसे इंटरनेट से जोड़कर हर शाम पर्दानशीन लड़कियों को बड़े-बड़े फैशन डिजाइनरों के बनाए डिजाइनों से रूबरू करती हूं।’ उसके पिता अब्दुल सत्तार अंसारी बुनकर हैं, वे रात दिन करघा चलाकर घर का खर्च चलाते हैं। बेटी के सिर पर हाथ रखकर अंसारी कहते हैं, ‘बेटी तूं डिजाइन सीख कपड़ा मैं बनाऊंगा।’ एक छोटे से लैपटॉप से युवा पीढ़ी ने नई मंजिलों के नए रास्ते खोजने शुरू कर दिए हैं। कुछ समय पहले मोबाइल फोन बनाने वाली एक कंपनी ने देश का अध्ययन करवाया तो पाया कि भारत की जेनरेशन जेड (वह पीढ़ी जिसका जन्म 1994 से 2004 के बीच हुआ है) के लगभग सात करोड़ शहरी उपभोक्ताओं में से तीन करोड़ के हाथ में मोबाइल फोन था और तीस लाख ब्राडबैंड के ग्राहक थे। मुफ्त लैपटॉप देने की घोषणा से पहले अखिलेश यादव इस बात से पूरी तरह वाकिफ थे। चुनाव से पहले जब वे क्रांति रथ से उत्तर प्रदेश की यात्रा कर रहे थे तो उन्होंने पूरे प्रदेश में इस पीढ़ी को देखा और समझा। इस पीढ़ी में कईं बातें एक जैसी थीं, उनमें आत्मविश्वास था, वे सोशल नेटवर्क के माध्यम से एक दूसरे से जुड़े थे। उन्होंने देखा कि बागियों जैसी मानसिकता वाले इस पीढ़ी के लोग बदलाव चाहते हैं और वे किसी विचारधारा का झोला नहीं ढो रहे। यहीं से उन्होंने ऐसा विकास मॉडल बनाने की बात सोची जिसकी बागडोर इसी जेनरेशन जेड के हवाले हो। मुफ्त लैपटॉप का वितरण इसी विकास मॉडल की दिशा में बढ़ाया गया कदम है। अखिलेश ने न सिर्फ इसका वायदा किया बल्कि मुख्यमंत्री बनने के बाद इसे प्राथमिकता के साथ निभाया भी। प्रदेश के चालू वित्त वर्ष के बजट में इसके लिए 2,700 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। पिछले चार महीनों में 79,000 लैपटॉप तो खुद मुख्यमंत्री ने बांटे हैं। नई पीढ़ी के बारे में सत्ता के शिखर से सोचा जाना इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि प्रदेश की आबादी का 60 फीसदी से ज्यादा हिस्सा युवा वर्ग ही है। प्रदेश के विश्वविद्यालय और महाविद्यालय हर साल लाखों की संख्या में इंजीनियर और दूसरे प्रोफेशनल तैयार करते हैं। इस पीढ़ी का पूरा फायदा प्रदेश को तभी मिल सकता था जब वह सोचने और काम करने के परंपरागत तरीकों से बाहर दुनिया भर के युवाओं की मुख्यधारा में शमिल हो। इस नौजवान पीढ़ी के हाथों में लैपटॉप आना इसी बदलाव की शुरुआत है। (ये लेखक के अपने विचार हैं)

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