
NEWS DESK | कानपुर |news war media -
चिकित्सकों व संसाधनों की कमी के चलते वेंटिलेटर पर पहुंच गए नगर निगम के अस्पतालों व डिस्पेंसरियों को फिर जिंदगी मिलेगी। इन्हें चलाने के लिए राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन कार्ययोजना तैयार कर रहा है। मिशन के पदाधिकारियों ने अस्पतालों के हालात का जायजा लिया।
नगर निगम सीमा में 44 अस्पताल व डिस्पेंसरी हैं। वर्ष 95 में शासन द्वारा मृत संवर्ग घोषित किए जाने से नगर निगम में चिकित्सकों की भर्ती पर रोक लग गई। वर्तमान में केवल दो स्थाई व सात दैनिक वेतन भोगी डॉक्टर के भरोसे चाचा नेहरू अस्पताल कोपरगंज, बीएन भल्ला अस्पताल बाबूपुरवा व जागेश्वर अस्पताल गोविंद नगर समेत 44 डिस्पेंसरी चल रहीं हैं। हालात यह है कि दूसरों को जीवन देने वाले अस्पताल, खुद आक्सीजन मांग रहे हैं। केवल चाचा नेहरू व जागेश्वर अस्पताल में ओपीडी चल रही है। एलोपैथिक में केवल एक डॉक्टर यूपी अग्रवाल हैं, जो मुख्य चिकित्साधिकारी भी हैं और अगस्त में सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन ने शहरी क्षेत्र के अस्पतालों को चलाने का फैसला लिया है। अभी चाचा नेहरू अस्पताल कोपरगंज में अरबन हेल्थ पोस्ट चल रहा है। इसके तहत मिशन के अपर निदेशक व चिकित्सा विभाग के विशेष सचिव डॉ शशांक विक्रम, जीएम डॉ मनीराम गौतम, पी शर्मा की अगुवाई में टीम ने चाचा नेहरू अस्पताल का निरीक्षण किया। नगर निगम के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ यूपी अग्रवाल ने बताया कि राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन के तहत निगम के अस्पतालों व डिस्पेंसरी को चलाने की तैयारी हो रही है। निगम का संपत्ति पर स्वामित्व रहेगा।
जागेश्वर अस्पताल
नगर निगम का गोविंद नगर स्थित 75 बेड का जागेश्वर अस्पताल वेंटिलेटर पर पहुंच गया है। इसका एक वार्ड जर्जर होने से बंद पड़ा है तो दूसरा रैन बसेरा बन गया है। दक्षिण क्षेत्र के लोगों के लिए 1957 में बना यह अस्पताल खुद आक्सीजन मांग रहा है। आपरेशन थियेटर बंद पड़ा है और अस्पताल की कई जगह छत गिर चुकी है।
चाचा नेहरू अस्पताल
सौ बेड के चाचा नेहरू अस्पताल, कोपरगंज में पिछले 16 साल से एक भी मरीज भर्ती नहीं हुआ है। आपरेशन थिएटर, एक्सरे व अल्ट्रासाउंड की मशीन सिर्फ दिखावा बनकर रह गई हैं। सभी कमरों में ताले लगे हैं। इंडोर सेवा बंद हो गई है। केवल ओपीडी चालू है।
बीएन भल्ला अस्पताल
बीएन भल्ला अस्पताल बाबूपुरवा में वार्ड व आपरेशन थियेटर रूम कई सालों से बंद है। अस्पताल के एक हिस्से में रैन बसेरा खोल दिया गया है। अस्पताल की बिल्डिंग जर्जर हो गई है
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