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नोएडा में एसडीएम के पद पर रहीं आइएएस दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन पर अफसरशाही का दबाव शायद काम कर जाए। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के आज कर्नाटक दौरे से लौटने के बाद सरकार नागपाल का निलंबन वापस लेने पर विचार करेगी।
उधर, समाजसेवी नूतन ठाकुर ने निलंबित आइएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी है जिस पर गुरुवार को सुनाई होने की संभावना है।
इधर दुर्गा का निलंबन उधर माफिया ने बनाए करोड़ों
सरकार ने नागपाल के निलंबन पर कल नौकरशाही के रोष को देखते हुए पुनर्विचार करने का आश्वासन दिया था। आज उस पर मुहर लग सकती है। गौरतलब है कि नोएडा में एसडीएम के पद पर तैनात रहीं 2009 बैच की आईएएस अधिकारी नागपाल को जिले के कदरपुर गांव में धार्मिक स्थल को गिराने के 27 जुलाई के आदेश के बाद शनिवार को निलंबित कर दिया गया था। एक तेजतर्रार अधिकारी के रुप में जानी जाने वाली अधिकारी ने जिले में अवैध खनन के खिलाफ अभियान छेड़ रखा था और एक हफ्ते में खनन माफिया के विरुद्ध 22 प्राथमिकी दर्ज करायी थीं।
भूमाफिया को दुर्गा ने डाली थी नकेल
नागपाल के निलंबन पर नौकरशाही तथा विपक्षी दलों ने तीखी टिप्पणी की। तमाम लोगों का मानना है कि खनन माफिया के दबाव में यह कार्रवाई की गयी और यह गलत हुआ। कार्यवाहक मुख्य सचिव आलोक रंजन ने कल आईएएस एसोसिएशन की बात गौर से सुनी। उन्होंने आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री के लौटने के बाद यह मामला उनके सामने रखा जाएगा। एसोसिएशन के सचिव पार्थसारथी सेन शर्मा के साथ 12 अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल मुख्य सचिव से मिलने गया था। उनकी मुख्य मांगों में आईएएस अधिकारी की निलंबन वापसी की मांग प्रमुख थी।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कल बंगलुरु में कहा था कि यह प्रशासनिक निर्णय है। उन्होंने कहा था कि साम्प्रदायिक सौहार्द बनाये रखने की दिशा में धार्मिक स्थल पर तोडफ़ोड़ अदूरदर्शी निर्णय था। मुख्यमंत्री ने कहा यह विड़बना है कि मीडिया सरकार पर कड़े फैसले न लेने का आरोप लगाती है और जब फैसला लिया जाता है तो उसकी इस तरह आलोचना होती है।
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