NEWS WAR |लखनऊ

तेलंगाना राज्य बनाए जाने के साथ ही उत्तर प्रदेश को चार राज्यों में बांटने की मांग एक बार फिर उठ खड़ी हुई है। बसपा प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने छोटे राज्य बनाए जाने का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार से सूबे को पुनर्गठित कर पूर्वाचल, बुंदेलखंड, अवध व पश्चिमी प्रदेश बनाए जाने की जोरदार मांग की है।
माल एवेन्यू स्थित आवास पर बुधवार को आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में मायावती ने आंध्रप्रदेश में तेलंगाना राज्य बनाए जाने का समर्थन करते हुए कहा कि यह केंद्र सरकार द्वारा काफी देर से लिया गया सही कदम है। उन्होंने कहा कि डॉ.अंबेडकर की सोच के मुताबिक बसपा देश में छोटे राज्यों व अन्य छोटी प्रशासनिक इकाईयों के गठन की हमेशा ही प्रबल समर्थक रही है। मायावती ने बताया कि उनके नेतृत्व में सूबे में चार बार बनी सरकार ने नई तहसीलें, जिले, मंडल, पुलिस रेंज व जोन आदि बनाए।
उत्तराखंड राज्य बनने के बावजूद आबादी के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश को चार अलग-अलग राज्यों [पूर्वाचल, बुंदेलखंड, पश्चिमी व अवध प्रदेश] के रूप में पुनर्गठित करने का प्रस्ताव भी उनके नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य विधानमंडल से पारित कराकर 23 नवंबर 2011 को केंद्र सरकार को भेज दिया था। बसपा प्रमुख ने कहा कि दुख की बात यह है कि संबंधित प्रस्ताव आज भी कांग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र की यूपीए सरकार के समक्ष लंबित पड़ा है। उन्होंने कहा कि संविधान के मुताबिक नए राज्यों के गठन का प्रावधान संसद के माध्यम से केंद्र सरकार में ही निहित है।
मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी की केंद्र सरकार से मांग है कि एक भाषा-एक राज्य के सिद्धांत को मानते हुए गोरखालैंड, महाराष्ट्र में विदर्भ आदि नए छोटे राज्य स्थापित किए जाने के साथ ही उत्तर प्रदेश को चार राज्यों में पुनर्गठित कर अलग पूर्वाचल, बुंदेलखंड, पश्चिमी प्रदेश व अवध राज्य बनाने की प्रक्रिया यथाशीघ्र पूरी की जाए। बसपा प्रमुख का मानना है कि इससे संबंधित क्षेत्रों के लोगों के साथ समुचित न्याय व विकास का मार्ग जल्द सुनिश्चित हो सकेगा। उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ व झारखंड जैसे नए छोटे राज्यों के बनने से यह बस देखने को मिल रहा है।
उन्होंने यहां के केंद्रीय मंत्रियों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें हवाई बयानबाजी करने के बजाय इस मामले में केंद्र सरकार की मोहर लगवानी चाहिए। एक सवाल पर बसपा प्रमुख ने कहा कि 80 लोकसभा सीटों वाले यूपी के चार राज्यों में बंटने से राष्ट्रीय स्तर पर भले ही इसकी हनक व दबदबा खत्म हो जाए लेकिन उन्हें तो इसकी हनक व दबदबे से ज्यादा जनता के हित का ख्याल रखना है।
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