Sunday, 29 March 2020

कोरोना लॉकडाउन : गाजियाबाद से चलकर लखनऊ 120 सवारी से भरी बस किराया 1200 छत में सीट 800


पूरे देश मे कोरोना वायरस से बचाव के लिए हुआ 21 दिन का लॉकडाउन। देश के लगभग हर राज्य में इसकी घोषणा के बाद से हड़कंप मचा हुआ है और पलायन जारी है। लॉकडाउन के बाद सेM दूसरे शहरों और राज्यों में फंसे लोग किसी भी कीमत पर अपने घरों को लौटना चाहते हैं। और तो और घर लौटने के लिए वह अपनी जिंदगी को भी दांव पर लगाए दे रहे हैं। घरों से न निकलने की पूरी पाबंदी के बाद एक मीटर की दूरी बनाए रखना तो दूर बल्कि सैकड़ों की संख्या में यात्री एक के ऊपर एक बैठकर सफर करने से भी परहेज नहीं कर रहे हैं। कानपुर में शनिवार दोपहर नौबस्ता में पुलिस ने जब एक प्राइवेट बस को रोककर उसकी चेकिंग की तो मौजूद सभी के होश उड़ गए। इस स्लीपर बस में ठूँस ठूंसकर कर यात्री बिठाये गए थे। इतना ही नहीं बस की छत पर भी यात्री लादे गए थे। पुलिस ने बस रोककर सभी यात्रियों की थर्मल टेस्टिंग करवाई। देश में लॉकडाउन घोषित होने के बाद कोई पैदल तो कोई साइिकल से सफर तय करता हुआ देखा जा रहा है। इस बीच कुछ लोग लागत से अधिक किराया देकर बसों में ठसाठस भरी भीड़ के बीच सफर कर संक्रमण के खतरे को अधिक से अधिक बढ़ावा दे रहे हैं। समूह में चलने और बस आदि में सफर की पाबंदी के बाद भी हाईवे पर सफर करने वालों का नजारा रोज देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश भर के सभी जिलों की सीमाओं को सील कर दिया गया है। इन सबके बावजूद भी कुछ समय के लिए वाहनों की आवाजाही की छूट मिलने के बाद हाईवे पर ऐसा नजारा दिखाई देने लगा है। गाजियाबाद से लखनऊ की तरफ जा रही सवारियों से भरी बस को एसीएम प्रथम ने नौबस्ता बाईपास पर रोककर मेडिकल टीम को सूचना दी। सूचना पर पहुंची मेडिकल टीम ने बस में भरे सभी यात्रियों की जांच पड़ताल की। बस का ड्राइवर हापुड़ निवासी शहनवाज ने बताया कि गाजियाबाद प्रशासन की अनुमति लेकर वह बस लेकर लखनऊ, सीतापुर के लिए 27 मार्च को निकले थे। मौजूद पुलिस बल ने बस से यात्रियों को नीचे उतरवाया। 60 सीटर बस में भरे 120 लोगों को देखकर सभी हैरान रह गए। डॉ. आलोक निगम, डॉ. राज बहादुर, डॉ. अजित सहित पांच लोगों की टीम ने यात्रियों का नाम पता व मोबाइल नम्बर नोट किया। सभी यात्रियों की थर्मल टेस्टिंग कराई गई। बस में सफर कर रहे कुछ यात्रियों ने हमें बताया कि बस के ड्राइवर और कंडक्टर ने बस के अंदर सीट में बैठने वालों से 1000 से 1200 रुपये वहीं छत पर बैठने वालों से 600 से 800 रुपये किराया वसूला गया है। ये सभी यात्री उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से चलकर लखनऊ के लिए 27 मार्च को निकले थे। ताज्जुब तो इस बात का है कि जो यात्री कुछ किलोमीटर के फासलों पर भी बस में चढ़े तो उनसे भी किराया उतना ही लिया गया जितना बैठने वालों से गाजियाबाद में तय किया गया था। लॉकडाउन में तेल, सब्जी, दाल, चीनी के बाद अब सीट और टिकटें भी दूने तीने रेट पर बिकनी खरीदनी लगी हैं। मजदूर, गरीब लूटा जा रहा है, जिन्हें बचाना या मदद करनी चाहिए वो रामायण का प्रसारण करवा कर फुल साइज एलसीडी में हाथ जोड़े बैठे हैं।

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