Tuesday, 29 March 2022

नई किताब बकलोल 78 का एक किस्सा

नई बस्ती का नसीम पिलंबर है। बहुत काम करता है। दूर-दूर जाकर काम करता है। नसीम रात-दिन काम करता है। लेकिन मुसीबत बड़ी यह की कमाई होती नहीं है। कभी-कभी तो जेब का किराया तक कम पड़ जाता है। कभी-कभार वो जिसकी मोटरसाईकिल में बैठकर ठाठ से घर छोड़ता है तो रास्ते में मिलाया जाने वाला आधा-आधा पेट्रोल खर्च तक कम पड़ जाता है। ये उसके साथ अक्सर होता था। घर की बिजली कट गई है। बिजली वाला बकाया 30-35 हजार जमा कराने की धमकी देकर गया है। तिसपर हूल ये की जुर्माना भी वसूला जा सकता है। दो-तीन बच्चे हैं नसीम के। कभी भीतर तो कभी बाहर घर में फुदकते रहते हैं। दुबला पतला सिंगल पसली नसीम। पड़ोसी ने आवाज देकर कहा नसीम आज मेरे सिंक का पाईप तो देख लेना जरा। बांदा से वापस आकर ठीक करने की कहकर साथी के दहेज में मिली अपाचे पर बैठकर गोली की स्पीड से निकल गया था। पापा..पापा करते बच्चे फिर से फुदकने लगे। कभी भीतर तो कभी बाहर। जब से इस नई बस्ती के बगल में केडीए की सरकारी कालोनियों का गठन हुआ नसीम और उसका परिवार तब से यहां रह रहा है। डबल स्टोरी के 50 वर्ग गज मकानों में एक पोर्शन यानी नीचे का मकान नसीम का है। उपर का मालिक कोई दूसरा। उस वक्त जो ज्यादा पइसेवाला आदमी रहा तो दोनो खरीद लिया। अन्यथा केडीए ने इन कालोनियों को भी सिंगल-सिंगल बेचकर बड़ा मुनाफा कमाया। नसीम वाले पोर्शन में नीचे तीन से चार कमरे हैं। चार परिवार हैं। तीन भाई नसीम के परिवार में 8 बच्चे हैं। बड़े वाले के बड़े बेटे की शादी हो गई तो उसका भी परिवार। मतलब 14 से 15 आदमी इतने से मकान में रहते हैं। घर का एक भी बालक- बालिका स्कूल नहीं जाता। खर्चा इफरात हो जाएगा। 100 बरस पूरे कर मां का 3 साल पहले इंतकाल हो गया। जमापूंजी के नाम पर सिर्फ यही एक मकान। कुआं खोदने से अच्छा सभी मिलकर रह रहे हैं। लेकिन सवाल वही कि कमाई घट रही और खर्चा बढ़ता जा रहा। यहां तक की गाने सुनने के शौकीन नसीम को अपना पिछले साल लाया सीडी प्लेयर और स्पीकर लगा एक बक्सा पर्सों बेच देना पड़ा। पेट्रोल डीजल, सब्जी, तेल, मिर्च के दाम आसमान छू रहे हैं। घर में कमाने वाले भी कम नहीं हैं, लेकिन काम नहीं है। जो काम करते हैं उनकी कमाई कम है। मन से संतोषी नसीम को उम्मीद है...बहुरेंगे। और कभी न तो कभी बिजली वाले उसपर रहम खाएंगे.... लेकिन एक दिन अचानक....पुलिस का 112 नंबर वाहन उसके दरवाजे आकर खड़ा होता है

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