Friday, 1 April 2022

परीक्षा पे चर्चा करते PM और लीक होते प्रश्नपत्र

आज फिर एक बड़ा इवेंट किया गया. नाम दिया 'परीक्षा पे चर्चा.' प्रधानमंत्री के इस कार्यक्रम में जितना रुपया खर्चा किया गया होगा, परीक्षायें उतने ही निम्न स्तर पर जा टिकी हैं। क्या प्रधानमंत्री को पता नहीं चला होगा कि, 2.0 सरकार के ठीक गठन बाद यूपी के 24 जिलों में अंग्रेजी का पर्चा लीक हो गया? हल प्रश्नपत्रों की लिखी-लिखाई कॉपियां 1000-500 तक में बिकी. क्या प्रधानमंत्री को ये भी पता नहीं चला होगा कि पर्चा लीक कांड में पुलिस ने आरोपियों को नहीं बल्कि बलिया के एक पत्रकार को जेल भेज दिया? अगर नहीं तो प्रधानमंत्री का सूचना तंत्र उतना ही खोखला है, जैसे भारत की ब्रह्मोस मिसाइल गलती से पाकिस्तान कूच कर गई. भक्त इसमें भी बहादुरी का किस्सा खोजकर कई दिन लहालोट होते रहे. कार्यक्रम के पहले कुछ सेकंड तक तो प्रधानमंत्री मंच की शोभा निहारते रहे. शायद गफलत में हों कि शुरू कहां से करना है. देश की सबसे बड़ी कुर्सी पर काबिज 71 साल के प्रधानमंत्री को 'महंगाई पे भी चर्चा' करनी चाहिए थी. कोरोना काल की बकाया फीस पर भी चर्चा करनी चाहिए थी. परीक्षा पे चर्चा करनी ही थी तो कम से कम उन छात्रों को जरूर निमंत्रण देना चाहिए था, जिनकी परीक्षा का पर्चा लीक हुआ. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. प्रधानमंत्री ने सिर्फ और सिर्फ मन की बात की तरह ये भी जबरन जनता और छात्रों पर थोप दिया. जिसकी जरूरत ही नहीं थी. 2014 से पहले भी परीक्षाएं होती थीं. बच्चे तैयारी करते थे. अब प्रधानमंत्री सरीखे लोग अपना असल काम छोड़कर 'परीक्षा पे चर्चा' कर रहे. इवेंट पर खर्चा कर रहे. जबकि ये पैसा नकल विहीन परिस्थितियों को मजबूत करने के मद में खर्च किया जा सकता था, लेकिन आत्ममुग्धता भी तो थोपी जाने के लिए ही होती है.

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